देश की इकलौटी यूनिवर्सिटी है AMU, जहां मनाया जाता है मोहर्रम, जानिए वजह
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) देश की इकलौती यूनिवर्सिटी है, जहां हर साल मोहर्रम पर मनाया जाता है. मोहर्रम का चांद दिखते ही दस दिन तक मजलिसें होती हैं और आशूरा के दिन जुलूस निकलता है. छात्र, प्रोफेसर और कर्मच…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हर साल मोहर्रम पर मनाया जाता है.
- मोहर्रम का चांद दिखते ही दस दिन तक मजलिसें होती हैं.
- आशूरा के दिन जुलूस निकलता है.
AMU न सिर्फ शिक्षा का केंद्र है, बल्कि इस्लामी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासतों को संजोकर रखने का भी जीता-जागता उदाहरण है. विश्वविद्यालय में हर साल मोहर्रम बेहद खास और व्यवस्थित तरीके से मनाया जाता है. जैसे ही मोहर्रम का चांद दिखाई देता है, यूनिवर्सिटी के भीतर मजलिसें शुरू हो जाती हैं और पूरा माहौल ग़म और अकीदत में डूब जाता है.
AMU के इमामबाड़े के इंचार्ज गुलाम रजा बताते हैं कि मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही यूनिवर्सिटी में अज़ाखाने सजाए जाते हैं. लगातार 10 दिनों तक मजलिसों का प्रोग्राम होता है जिसमें इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को याद किया जाता है. इन मजलिसों में यूनिवर्सिटी के छात्र, प्रोफेसर और कर्मचारी बड़ी तादाद में शामिल होते हैं.
आशूरा के दिन निकलता है जुलूस
मोहर्रम की 10वीं तारीख यानी आशूरा के दिन यूनिवर्सिटी परिसर से एक बड़ा जुलूस निकाला जाता है. यह जुलूस शमशाद मार्केट से होता हुआ शाहजमाल स्थित कर्बला तक पहुंचता है. इस जुलूस में लोग मातम करते हुए, इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं.
यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक आस्था को दर्शाती है बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक शिक्षण संस्थान अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ा रह सकता है. AMU में मोहर्रम का यह आयोजन छात्रों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़ता है.