धान-गेहूं से उकता कर करने लगा अश्वगंधा की खेती, 60 हजार रुपये प्रति क्विंटल पीट रहा गोंडा का किसान
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Ashwagandha farming : इसकी जड़ों और पत्तिययों की मांग हमेशा रहती है. इनका उपयोग कई तरह की दवाओं में होता है. सही तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं.
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का एक किसान पारंपरिक खेती की जगह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी अश्वगंधा उगाकर लाखों रुपये कमा रहा है. किसान शिवकुमार मौर्य पहले पारंपरिक फसलें जैसे गेहूं और धान की खेती करते थे, लेकिन उसमें ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा था.

Local 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान शिवकुमार मौर्य बताते हैं कि उन्होंने इंटरनेट और कृषि विभाग से जानकारी लेकर ये जाना कि अश्वगंधा की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही है. इसके बाद उन्होंने एक एकड़ जमीन पर अश्वगंधा की खेती शुरू की. शुरुआत में उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसमें महारत हासिल कर ली.

शुरुआत में शिव कुमार मौर्य को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने धीरे-धीरे इसकी खेती में अनुभव हासिल किया और आज वह हर साल लाखों रुपये कमा रहे हैं. उनके इस प्रयास से इलाके के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और वैकल्पिक खेती की ओर मुड़ रहे हैं.

किसान शिवकुमार मौर्य बताते हैं कि अश्वगंधा की जड़ों और पत्तियों की बाजार में हमेशा मांग रहती है, क्योंकि इनका उपयोग कई तरह की दवाओं और आयुर्वेदिक उत्पादों में होता है. बाजार में अश्वगंधा की कीमत 40,000 से 60,000 रुपये प्रति क्विंटल तक होती है. सही तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में 2 से 3 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है.

शिवकुमार बताते हैं कि अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है. इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में हजारों साल से हो रहा है.

अश्वगंधा में एडाप्टोजेनिक गुण होते हैं, जो तनाव और चिंता को कम करने में मदद करते हैं. ये कॉर्टिसोल हार्मोन को संतुलित करता है, जिससे दिमाग को शांति मिलती है.

अश्वगंधा शरीर की शक्ति और स्टैमिना बढ़ाने में मदद करता है. खिलाड़ी और जिम जाने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं ताकि मांसपेशियां मजबूत हों और थकान कम लगे.

किसान शिवकुमार मौर्य के अनुसार, अश्वगंधा शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत करता है. ये शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ाकर संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है.