पेट में गुजर गया 5 महीने का बच्चा, साहसी मां ने भ्रूण कर दिया दान,अब एम्स में होगा ये काम

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पेट में गुजर गया 5 महीने का बच्चा, साहसी मां ने भ्रूण कर दिया दान,अब एम्स में होगा ये काम


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एक मां का साहस क्‍या होता है, यह खबर आपको बताएगी. जब 5 महीने का बच्‍चा पेट में गुजर जाने पर मां ने भ्रूण को एम्‍स अस्‍पताल में दान करने का फैसला कर लिया. यह कहानी है द‍िल्‍ली के रोहिणी की रहने वाली वंदना जैन की…और पढ़ें

पेट में गुजर गया 5 महीने का बच्चा, साहसी मां ने भ्रूण कर दिया दान,अब एम्स....मां ने एम्‍स को दान क‍िया पांच महीने का भ्रूण.
Mother donated Fetal to Aiims Delhi: इतिहास में आपने जांबाज मांओं के उदाहरण पढ़े होंगे, जब उन्होंने अपने बेटों को देश, समाज या मानवता की भलाई के लिए बलिदान कर दिया. आज भी ऐसी मांए हैं, जिनकी मिसाल दी जा सके, जिनके साहस को नमन किया जा सके. ऐसी ही एक मां हैं दिल्ली के रोहिणी की रहने वाली 32 साल की वंदना जैन. जिन्होंने 5 साल के पहले बेटे के बाद दोबारा मां बनने का फैसला किया लेकिन प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था. 5 महीने की गर्भवती वंदना के बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो गई.

जब इस बात का पता मां और पूरे परिवार को चला तो उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. हालांकि इस भीषण दुख के बावजूद उन्होंने भ्रूण को दान करने का फैसला कर लिया. 7 सितंबर 2025 की सुबह 8 बजे जैन परिवार से जुड़े जीपी तायल ने दधीचि देहदान समिति के संस्थापक सदस्य सुधीर गुप्ता से संपर्क किया और भ्रूण को मेडिकल रिसर्च और एजुकेशन के लिए दान करने के अपने फैसले के बारे में बताया.

इसके बाद वंदना जैन को एम्स ले जाया गया, जहां मृत बच्चे को गर्भ से बाहर निकालने के लिए मां का दर्द बढ़ाने वाली दवाएं दी गई और आखिरकार कई घंटे दर्द सहन करने के बाद शाम को 7 बजे भ्रूण की डिलीवरी हुई और उसे एम्स अस्पताल में दान कर दिया गया. यह भ्रूण भी बेटा ही था. फिलहाल मां स्वस्थ हैं.

यह पूरी प्रक्रिया एम्स दिल्ली के एनाटॉमी विभाग के प्रोफेसर सुब्रत बसु रे के नेतृत्व में किया गया. उन्होंने बताया कि अब भ्रूण पर एम्स में मौजूद डॉक्टर्स रिसर्च प्रक्रियाएं कर सकेंगे.

गुप्ता ने कहा कि यह पहली बार है जब भ्रूण दान कर दिया गया है. जैन परिवार का यह अद्भुत फैसला है और अपने आप में मिसाल है. पिछले साल उनकी समिति ने एक परिवार को इसके लिए तैयार किया था लेकिन करीब 48 घंटे का समय बीत जाने के बाद परिवार की हिम्मत जवाब दे गई और उन्होंने फैसला बदल दिया था.

उन्होंने कहा कि दधीचि देहदान समिति सिर्फ सरकारी अस्पतालों में अंगदान की प्रक्रिया करवाती है. ताकि मृत देह समाज, देश और इंसानियत के काम आ सके. दधीचि देहदान समिति पिछले कई सालों से लोगों को मृत्यु के बाद शरीर के प्रमुख दान करने के लिए प्रेरित कर रही है.

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priya gautamSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्… और पढ़ें

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