फर्रुखाबाद में सजी कान्हा की प्रतिमाओं की दुनिया, मिट्टी के सामान की बढ़ी मांग

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फर्रुखाबाद में सजी कान्हा की प्रतिमाओं की दुनिया, मिट्टी के सामान की बढ़ी मांग


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Janmashtami 2025: देशभर में जन्माष्टमी का पावन पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है. इस अवसर पर भक्त लड्डू गोपाल और राधा-कृष्ण की मूर्तियों, झूलों, पोशाकों और अन्य सजावटी सामान की खरीदारी करने बाजार आते हैं. मात…और पढ़ें

जन्माष्टमी का पावन पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है. इस अवसर पर भक्त लड्डू गोपाल और राधा-कृष्ण की मूर्तियों, झूलों, पोशाकों और अन्य सजावटी सामान की खरीदारी करने बाजार आते हैं. माता-पिता अपने बच्चों को भी भगवान कृष्ण और राधा के रूप में सजाते हैं. जिससे यह पर्व और भी रंगीन और आनंदमय बन जाता है.

देशभर में जहां एक ओर जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. ऐसे समय पर तैयारी भी जोरों से चल रही हैं. इसी को लेकर फर्रुखाबाद में भी पीतल का कार्य करने वाले कारीगरों ने कान्हा के विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं तैयार की है. जिनमें कान्हा जी की सबसे छोटी से लेकर सबसे बड़ी प्रतिमा को ऑर्डर पर यहां के कारीगरों ने बेहद कुशलता के साथ सुंदर बनाया है. जो बाजार में पहुंचते ही हर किसी को पसंद आ रही है और जमकर की बिक्री भी हो रही है. इस समय यह बाजार फर्रुखाबाद के आवास विकास मुख्य मार्ग पर लगा हुआ है.

सभी कीमतों के लिए ऑर्डर
कारीगर दुकानदार बताते हैं कि यहां पर आर्डर काफी पहले ही मिलने लगते हैं. मुख्य रूप से वह प्रतिमा को वजन के अनुसार ही बनाते हैं. सबसे कम रेट पर 150 रुपए और अधिकतम वह चार से पांच हजार रूपए तक की प्रतिमा तैयार कर देते हैं. इन प्रतिमाओं को बनाने में मुख्य रूप से पीतल का इस्तेमाल किया जाता है. यह जो प्रतिमाएं तैयार की जाती है यह कान्हा जी के बाल गोपाल के स्वरूप की होती है. इनकी सर्वाधिक डिमांड श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर अधिक रहती है. अगर आप भी करना चाहते हैं कान्हा की प्रतिमा की खरीदारी तो आप घूमना गली कूंचा, कमालगंज, फतेहगढ़ की दुकानों पर सही कीमतों पर कर सकते है खरीदारी.

मिट्टी का बनता है सामान
मिट्टी की कारीगरी में बहुत अधिक श्रम लगता है. जिस प्रकार मिट्टी को बनाने के बाद सांचों की सहायता से इसे आकर दिया जाता है. इसके बाद उसमें से निकालने के लिए छोटे-छोटे उपकरणों से डिजाइन बनाई जाती है. जिसमें सफाई और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है तब जाकर यह एक सामान बनता है जिसमें पराते, सिंहासन, बटुआ, त्रिशूल, बर्तन, बेला, जल पात्र, ग्लास और विभिन्न प्रकार की प्रतिमाएं, कडा, संदूक और अन्य सामान ऑर्डर देने पर बनाया जाता है. जिनकी रहती है हर समय मांग.

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