1000 किलो का घंटा, आज भी सुनाई देती है जिसकी आवाज! मिर्जापुर की ऐतिहासिक धरोहर
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Mirzapur News: मिर्जापुर का ऐतिहासिक घंटाघर 18वीं सदी में अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया था. लाल बलुआ पत्थरों से बना यह भवन दिन में लाल और रात में सात रंगों में जगमगाता है.
मिर्जापुर के घंटाघर भवन में एक हजार किलो वजन का विशाल घंटा लगा हुआ है. अंग्रेजों के समय में इस घंटा के माध्यम से समय का आंकलन किया जाता था. शहर के मध्य में स्थित यह भवन सिर्फ व्यवसायिक केंद्र नहीं बल्कि अंग्रेजों के प्रशासनिक नियंत्रण का भी हिस्सा रहा है. आज इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है और अभी भी घंटे की आवाज सुनाई देती है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है.
घंटाघर का निर्माण 1891 ईस्वी में हुआ था और इसमें लाल बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है. भवन की दीवारों में आय-व्यय का ब्यौरा पत्थरों में खुदा हुआ है. मीनार में लगी घड़ी लंदन के मेसर्स मियर्स स्टैन बैंक द्वारा लगवाई गई थी और यह गुरुत्वाकर्षण से संचालित होती थी. घड़ी का कुल वजन लगभग 1000 किलोग्राम है, जिसमें घंटा और पेंडुलम शामिल हैं. यह घड़ी आज भी मिर्जापुर के लोगों की शान है और इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है.
पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व
मिर्जापुर का यह ऐतिहासिक घंटाघर न केवल स्थानीय लोगों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. भव्यता, ऐतिहासिकता और संस्कृति का मेल इसे विशेष बनाता है. यदि आप मिर्जापुर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इस घंटाघर की यात्रा को अपनी सूची में जरूर शामिल करें.