मऊ का 12 द्वारिया शिव मंदिर: जहां श्रीराम-लक्ष्मण ने भी की थी भोलेनाथ की पूजा

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मऊ का 12 द्वारिया शिव मंदिर: जहां श्रीराम-लक्ष्मण ने भी की थी भोलेनाथ की पूजा


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Mau Shiv Mandir: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में नौसेमर घाट पर स्थित 12 द्वारिया शिव मंदिर अत्यंत अलौकिक है. स्वयंभू शिवलिंग वाले इस धाम में त्रेतायुग में श्रीराम, लक्ष्मण और विश्वामित्र ने पूजा की थी. केदारनाथ से रामेश्वरम की देशांतर रेखा पर स्थित इस मंदिर की तुलना झारखंड के देवघर से होती है. यहां सच्चे मन से मांगी मन्नत पूरी होती है, लेकिन झूठी कसम खाने पर तुरंत फल मिलता है. सावन और सोमवार को यहां जलाभिषेक के लिए भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ता है.

Mau Shiv Mandir: उत्तर प्रदेश को धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों का गढ़ माना जाता है, जहां प्रत्येक जनपद और उसके मंदिरों का अपना एक विशिष्ट महत्व है. इसी कड़ी में मऊ जनपद के नौसेमर घाट पर स्थित ’12 द्वारिया शिव मंदिर’ की कहानी सबसे अलग और अलौकिक है. इस मंदिर की तुलना सीधे झारखंड के सुप्रसिद्ध देवघर धाम से की जाती है. सावन के महीने में और विशेषकर हर सोमवार को यहां उमड़ने वाला आस्था का जनसैलाब इस बात का प्रमाण है. त्रेतायुग के इतिहास से लेकर स्वयंभू शिवलिंग तक, आइए जानते हैं इस चमत्कारी मंदिर की पूरी गाथा.

स्वयंभू शिवलिंग: त्रेतायुग में श्रीराम, लक्ष्मण और विश्वामित्र ने की थी पूजा
लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए मंदिर के पुजारी रितेश कुमार बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में कभी भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी और महर्षि विश्वामित्र ने स्वयं यहां आकर पूजा-पाठ किया था. मंदिर में स्थापित यह शिवलिंग किसी इंसानी हाथों द्वारा नहीं बनाया गया है, बल्कि यह जमीन के अंदर से स्वयं प्रकट (स्वयंभू) हुआ है. इसी वजह से इस धाम का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि महिमा के मामले में यह धाम झारखंड के देवघर से जरा भी कम नहीं है.

केदारनाथ से रामेश्वरम की देशांतर रेखा पर 11वां स्थान
पुजारी रितेश कुमार आगे बताते हैं कि यह भगवान शिव का ऐसा दुर्लभ मंदिर है, जो केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक की देशांतर रेखा में 11वें नंबर पर आता है. पूर्वजों के अनुसार, लगभग 250 वर्ष पूर्व यहां तमसा और पवित्र सरयू नदी का मिलन हुआ था. उस ऐतिहासिक संगम के गवाह के रूप में आज भी यहाँ दो सीढ़ियां बनी हुई हैं. मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि आप सच्चे और पवित्र हृदय से यहां कोई भी मन्नत माँगते हैं, तो वह अवश्य पूरी होती है.

गलत नीयत या झूठी कसम की तुरंत मिलती है सजा
इस मंदिर की न्याय व्यवस्था को लेकर एक सख्त मान्यता भी है. यदि कोई व्यक्ति यहां गलत नीयत से आता है या गलत मन्नत मांगता है, तो उसके साथ विपरीत परिणाम होने लगते हैं और उसकी परेशानियां बढ़ जाती हैं. इसी डर से यहां आज तक कोई भी व्यक्ति झूठी कसम खाने की हिम्मत नहीं करता है. यही वजह है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु सच्चाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लेता है, क्योंकि गलत राह पर चलने वाला व्यक्ति तुरंत परेशान होने लगता है.

12 द्वारों वाला अनूठा धाम, जहां लगता है देवघर जैसा मेला
सोमवार का दिन भगवान शंकर का अति प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए यहां प्रत्येक सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है. सावन के पवित्र महीने में तो यहां हर दिन मेला जैसा माहौल रहता है, लेकिन सोमवार को श्रद्धालुओं का हुजूम देखते ही बनता है. यहां जल चढ़ाने का महत्व झारखंड के देवघर में स्थित शिवलिंग जितना ही माना जाता है और इसी अटूट विश्वास के साथ लोग सावन में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मंदिर में 12 दरवाजे लगे होने के कारण इसे ‘बारह द्वारिया’ के नाम से जाना जाता है और इसकी इसी देवघर जैसी महिमा के कारण यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…

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