मासूम से रेप-मर्डर केस में नपे SHO, SIT की रिपोर्ट पर CJI सूर्यकांत का आदेश
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गाजियाबाद में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसआईटी रिपोर्ट की समीक्षा की. इसके आधार पर संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. उसे लाइन हाजिर कर दिया गया है. इसके अलावा, एसआईटी के सुझाव पर अब सीसीटीवी फुटेज को 15 दिनों के बजाय कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है.
गाजियाबाद मासूम बच्ची की रेप-हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त (फाइल फोटो)
नई दिल्ली/गाजियाबाद: गाजियाबाद में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित महिला अधिकारियों की विशेष जांच टीम (एसाईटी) ने अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर दी है. इससे पहले अदालत ने मामले की पुलिस जांच में कई खामियों पर ऐतराज जताया है. बच्ची को इलाज देने में टालमटोल करने वाले निजी अस्पतालों की भी जमकर खिंचाई की थी.
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को एसआईटी द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी एएसजी ने बताया कि एसआईटी ने जांच के शुरुआती चरण में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोपी संबंधित SHO के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है. सिफारिश के तुरंत बाद संबंधित थाना प्रभारी का तबादला कर उसे पुलिस लाइन भेज दिया गया है.
CCTV फुटेज और सुरक्षा को लेकर बदले नियम
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस प्रशासन और इलाके की सुरक्षा व्यवस्था में कई सुधार लागू किए गए हैं:
- 6 महीने सुरक्षित रहेगी फुटेज: पहले इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज केवल 15 दिनों तक ही सुरक्षित रखी जाती थी. लेकिन एसआईटी की सिफारिश के बाद अब निर्देश जारी किए गए हैं कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को कम से कम 6 महीने से अधिक समय तक सुरक्षित रखा जाए ताकि जांच में कोई बाधा न आए.
- विशेष सुरक्षा अभियान: इलाके को अपराध प्रभावित क्षेत्र बनने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा विशेष गश्त और सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं.
गंभीर लापरवाही है – सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘यह बेहद गंभीर लापरवाही का मामला है. हमें एसआईटी की पूरी रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन करना होगा.’ बाद में आदेश सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट का अवलोकन किया है और यूपी सरकार की ओर से पेश दलीलें भी सुनी हैं.
अगले हफ्ते होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित/दूसरी तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें भी एसआईटी रिपोर्ट का अध्ययन करने का अवसर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण करने से पहले दूसरी पक्ष की दलीलें सुनने की बात कही है. शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए तय की है.