वन महोत्सव में हर साल लगते लाखों पौधे, फिर भी क्यों नहीं बचते? ये 3 गलतियां सबसे घातक

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वन महोत्सव में हर साल लगते लाखों पौधे, फिर भी क्यों नहीं बचते? ये 3 गलतियां सबसे घातक


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Ghazipur News : सरकार की ओर से हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में वे कुछ ही महीनों में सूख जाते हैं. आखिर इसकी वजह क्या है. लोकल 18 ने इस बारे में गाजीपुर के रिटायर्ड हॉर्टिकल्चर प्रोफेसर डॉ. वशिष्ठ यति से बात की. डॉ. यति कहते हैं कि सफल पौधरोपण के लिए सिर्फ पौधा लगाना काफी नहीं, बल्कि सही समय और मिट्टी की स्थिति भी उतनी ही जरूरी है. डॉ. यति बताते हैं कि पहले मई के महीने में गड्ढे तैयार किए जाते थे, जून में पानी देकर मिट्टी को ठंडा किया जाता था और बरसात के 15 दिन बाद पौधे लगाए जाते थे. यही वजह है कि उस दौर में लगाए गए पेड़ आज भी शान से खड़े हैं.

गाजीपुर. जुलाई का महीना आते ही चारों तरफ पौधरोपण की धूम मच जाती है. सरकार के आंकड़े कहते हैं कि बीते सालों में करोड़ों पौधे लगे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनमें से कितने पौधे आज जीवित हैं. इनमें से बड़ी संख्या में पौधे कुछ ही महीनों में सूख क्यों जाते हैं. पीजी कॉलेज गाजीपुर के उद्यान विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. वशिष्ठ यति मानते हैं कि समस्या पौधे लगाने की नहीं, बल्कि सही समय और वैज्ञानिक तरीके से रोपण न करने की है. लोकल 18 से डॉ. यति बताते हैं कि वन महोत्सव सप्ताह की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी. इसका उद्देश्य अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था. यह अभियान आज भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और तापमान के बीच पेड़ ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. पहले मई के महीने में गड्ढे तैयार किए जाते थे, जून में पानी देकर मिट्टी को ठंडा किया जाता था और बरसात के 15 दिन बाद पौधे लगाए जाते थे. यही कारण है कि उस दौर में लगाए गए पेड़ आज भी शान से खड़े हैं.

मिट्टी से पौधों के लिए घातक

डॉ. यति के अनुसार, सरकार और वन विभाग हर साल बड़ी संख्या में पौधे लगाते हैं, लेकिन उनका जीवित रहना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. पहले बरसात जून के मध्य से लगातार होती थी, जिससे मिट्टी का तापमान कम हो जाता था. अब मानसून अनियमित हो गया है और कई जगह बारिश देर से होती है. आजकल बिना बरसात के, गर्म मिट्टी में सीधे पौधे लगा दिए जाते हैं. धरती के अंदर की भीषण गर्मी और भाप (Steam) नए पौधों की नाजुक जड़ों को तुरंत झुलसा देती है. इसी वजह से करोड़ों खर्च करने के बाद भी पौधे जीवित नहीं रह पाते.

कब करें पौधरोपण

डॉ. यति का सुझाव है कि लगातार 10 से 15 दिन अच्छी बारिश होने के बाद ही बड़े स्तर पर पौधरोपण करना अधिक उपयुक्त रहता है. इससे मिट्टी में पर्याप्त नमी आ जाती है और पौधों की जड़ों को विकसित होने का बेहतर अवसर मिलता है. दिसंबर के बाद पौधे लगाने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि ठंड में पौधों की वेजिटेटिव ग्रोथ रुक जाती है. डॉ. यति के अनुसार, 1 जुलाई से सितंबर के अंत तक पौधरोपण का सबसे अच्छा समय माना जाता है. इसके बाद ठंड बढ़ने पर पौधों की नई पत्तियों और जड़ों का विकास धीमा हो जाता है.

इसमें बदलाव की जरूरत

डॉ. यति के मुताबिक, वन विभाग और सरकार को अपने ‘प्लांटेशन कैलेंडर’ पर पुनर्विचार करना चाहिए. कागजों पर लाखों पौधे दिखाने से बेहतर है कि कम पौधे लगाएं, लेकिन उन्हें जीवित रखने की जिम्मेदारी लें. पौधरोपण अभियानों में केवल संख्या पर ध्यान देने के बजाय पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ाने पर भी जोर दिया जाना चाहिए. सही समय, पर्याप्त नमी और वैज्ञानिक तरीके से रोपण करने पर ही अभियान का उद्देश्य सफल हो सकता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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