3 महीने में तैयार, लागत हर फसल से कम…धान की जगह लगा दें तिल, एक्सपर्ट से जानें ट्रिक

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3 महीने में तैयार, लागत हर फसल से कम…धान की जगह लगा दें तिल, एक्सपर्ट से जानें ट्रिक


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3 महीने में तैयार, लागत हर फसल से कम…धान की जगह इस ट्रिक से लगा दें तिल

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Til ki kheti : खरीफ सीजन में कई किसान धान की जगह तिल की खेती करना पसंद करते हैं. इसे कम पानी और कम लागत में उगाया जा सकता है. तिल को जुलाई माह में बोया जाता है. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के वैज्ञानिक डॉ. सूर्य प्रकाश मिश्र लोकल 18 से बताते हैं कि तिल की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे सही है. बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर खेत में 5 से 7 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर मिलाएं. बुवाई के बाद खेत में पानी का ठहराव बिल्कुल न होने दें क्योंकि इससे जड़ सड़ सकती है. पानी ठहरने से तिल में रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है. बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई कर लें. फसल 85 से 100 दिन में पककर तैयार हो जाती है.

सुल्तानपुर. खरीफ सीजन में कई किसान तिल की खेती करना पसंद करते हैं. किसान को इसकी बुवाई से पहले कुछ बातें जान लेनी चाहिए. इससे पैदावार बढ़ेगी और नुकसान नहीं होगा. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉ. सूर्य प्रकाश मिश्र लोकल 18 से बताते हैं कि तिल खरीफ मौसम की एक ऐसी तिलहनी फसल है, जिसे कम पानी और कम लागत में उगाया जा सकता है. इसे जुलाई माह में बोया जाता है. इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है. खेत की 2 से 3 बार अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें. फिर पाटा चलाकर खेत को समतल कर लें. बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 5 से 7 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर मिलाएं. बुवाई के लिए प्रमाणित और रोग मुक्त बीजों का ही चयन करें.
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क्या सिंचाई भी करना जरूरी
डॉ. सूर्य प्रकाश मिश्र के मुताबिक, तिल को संतुलित पोषण देना जरूरी है. इससे फसल मजबूत होती है और ज्यादा फलियां बनती हैं. तिल की खेती के लिए मिट्टी का परीक्षण भी कराना जरूरी है. अगर वर्षा कम हो रही हो तो हल्की सिंचाई करनी चाहिए, लेकिन खेत में पानी का ठहराव बिल्कुल न होने दें क्योंकि इससे जड़ सड़ सकती है और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है. बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई और 35 से 40 दिन बाद दूसरी निराई करनी चाहिए.

कैसे करें रोग और कीट नियंत्रण
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सूर्य प्रकाश मिश्र बताते हैं कि तिल की फसल में पत्ती धब्बा रोग, फाइलोडी रोग और माहू जैसे कीटों का प्रकोप देखा जाता रहा है. इसलिए किसान भाइयों को बराबर खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए. रोगग्रस्त पौधों को खेत से निकाल देना भी लाभदायक रहता है. तिल की फसल लगभग 85 से 100 दिन में पककर तैयार हो जाती है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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