सहारनपुर में कांवड़ यात्रा के बीच यहां क्यों रुक जाते हैं भोले के भक्त? जानें वजह
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Saharanpur Kanwar Mela: सावन आते ही सहारनपुर का कांवड़ मेला आस्था और मनोरंजन का बड़ा केंद्र बन जाता है. कांवड़ यात्रा के दौरान जहां हजारों शिवभक्त इस रास्ते से गुजरते हैं, वहीं बाबा बंसी वाले मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण लगने वाला यह मेला लोगों के आकर्षण का खास केंद्र रहता है. करीब 25 से 30 साल पुराने इस मेले में बच्चों के झूले, खाने-पीने की दुकानें, खिलौने और आकर्षक झांकियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.
सहारनपुर: सावन का महीना आते ही पूरा माहौल शिवभक्ति में रंग जाता है. कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु अलग-अलग रास्तों से हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं. इसी यात्रा के बीच सहारनपुर में एक ऐसा मेला भी लगता है, जहां भक्ति के साथ मनोरंजन और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता है. यहां कांवड़ियों के स्वागत के साथ-साथ बच्चों के झूले, खाने-पीने की दुकानें, खिलौने और आकर्षक झांकियां लोगों का ध्यान खींचती हैं.
इस मेले की शुरुआत करीब 25 से 30 साल पहले बाबा बंसी वाले के प्रयासों से हुई थी. स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा से जुड़ी एक चमत्कारी घटना के बाद उनकी प्रसिद्धि बढ़ी और लोगों की आस्था उनसे जुड़ गई. बताया जाता है कि एक बार हलवा बनाते समय घी खत्म हो गया था. बाबा ने उसमें पानी डालने के लिए कहा तो पानी घी में बदल गया. बाद में जब घी आया और उसे पानी में डालने के लिए कहा गया तो वह पानी बन गया. इस घटना के बाद बाबा की जय-जयकार होने लगी और यहां मंदिर का निर्माण कराया गया. इसके बाद सावन के दिनों में मेले की शुरुआत हुई.
25 साल से लगातार सज रहा है कांवड़ मेला
सहारनपुर में लगने वाला यह मेला पिछले कई वर्षों से कांवड़ यात्रा का खास आकर्षण बना हुआ है. सावन के दौरान यहां सुबह से लेकर शाम तक लोगों की भीड़ नजर आती है. आसपास के गांवों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं. कांवड़ियों की सुंदर झांकियां और यात्रा का उत्साह इस मेले को और खास बना देते हैं.
कांवड़ मार्ग पर सजती है अलग ही रौनक
कांवड़ यात्रा के समय सहारनपुर से होकर गुजरने वाले अंबाला रोड पर भी अलग ही नजारा देखने को मिलता है. यह मार्ग सामान्य दिनों में सहारनपुर से अंबाला जाने का मुख्य रास्ता है, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान इसे श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया जाता है और आकर्षक तरीके से सजाया जाता है. जब कांवड़िये इस रास्ते से गुजरते हुए मेले तक पहुंचते हैं तो यहां की सजावट और माहौल देखकर कुछ देर रुक जाते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान जहां ज्यादातर जगहों पर सिर्फ श्रद्धालुओं की आवाजाही दिखाई देती है, वहीं सहारनपुर का यह मेला यात्रा में मनोरंजन और उत्साह का रंग भी जोड़ देता है.
बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए खास
इस मेले में बच्चों के लिए तरह-तरह के झूले और खिलौने उपलब्ध रहते हैं, वहीं खाने-पीने की कई चीजें भी लोगों को आकर्षित करती हैं. कम कीमत में मिलने वाली वस्तुओं की वजह से स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. कांवड़ियों की भक्ति, सावन का माहौल और मेले की रौनक मिलकर सहारनपुर के इस आयोजन को खास बना देते हैं. यही वजह है कि हर साल सावन के महीने में यह मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…
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