‘साक्षात बजरंगबली विराजमान’, ये गोरखपुर का सबसे पुराना हनुमान मंदिर

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‘साक्षात बजरंगबली विराजमान’, ये गोरखपुर का सबसे पुराना हनुमान मंदिर


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‘साक्षात बजरंगबली विराजमान’, ये गोरखपुर का सबसे पुराना हनुमान मंदिर

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Gorakhpur Hanuman Temple : गोरखपुर के बेतियाहाता का हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और इतिहास की वजह से अलग पहचान रखता है. हर मंगलवार यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है. पुजारी आचार्य रामनारायण त्रिपाठी लोकल 18 से बताते हैं कि मंदिर की स्थापना 1963 में हुई थी, जबकि 1965 में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई. रामनारायण त्रिपाठी बताते हैं कि मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी सबसे पहले उनके पिता को सौंपी गई थी. कई भक्त यह भी कहते हैं कि यहां उन्हें केवल प्रतिमा नहीं, बल्कि साक्षात बजरंगबली के दर्शन होते हैं.

गोरखपुर. यूपी के गोरखपुर में आस्था के कई केंद्र हैं, लेकिन बेतियाहाता स्थित हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और इतिहास के कारण अलग पहचान रखता है. शहर के सबसे पुराने हनुमान मंदिरों में गिने जाने वाले इस मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था दशकों से जुड़ी हुई है. यहां के महंत और पुजारी का दावा है कि मंदिर में केवल भगवान हनुमान की प्रतिमा नहीं, बल्कि साक्षात बजरंगबली का वास है. यही वजह है कि हर मंगलवार यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. मंदिर के पुजारी आचार्य रामनारायण त्रिपाठी लोकल 18 से बताते हैं कि इसकी स्थापना वर्ष 1963 में हुई थी, जबकि 1965 में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई. मंदिर की स्थापना का विचार उस समय गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी एलए नागर ने रखा था. इसके बाद मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा में गीता प्रेस से जुड़े ‘कल्याण’ पत्रिका के संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार का महती योगदान रहा.

तीन पीढ़ियों से सेवा

रामनारायण त्रिपाठी बताते हैं कि मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी सबसे पहले उनके पिता को सौंपी गई थी. बाद में उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से आचार्य की शिक्षा प्राप्त की और 1970 के दशक के बाद मंदिर की सेवा संभाल ली. आज भी उनका पूरा परिवार मंदिर परिसर में बने आवास में रहता है और प्रतिदिन सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना एवं श्रद्धालुओं की सेवा में लगा रहता है. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां आने वाले श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है.

दोबारा आते हैं

पुजारी रामनारायण त्रिपाठी के अनुसार, केवल गोरखपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से भी लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर आकर धन्यवाद अर्पित करते हैं. कई भक्त यह भी कहते हैं कि यहां उन्हें केवल प्रतिमा नहीं, बल्कि साक्षात बजरंगबली के दर्शन का अनुभव होता है. मंगलवार के दिन मंदिर परिसर में इतनी भीड़ होती है कि कई बार पैर रखने तक की जगह नहीं बचती, सुबह से देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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