सिंधु का पानी रोका है, जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान को दाना-पानी के लिए तरसा देंगे: राजनाथ सिंह

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सिंधु का पानी रोका है, जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान को दाना-पानी के लिए तरसा देंगे: राजनाथ सिंह


आगरा. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को उत्तर प्रदेश के आगरा में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आगरा की इस धरती पर वीरता, स्वाभिमान और देशभक्ति के अमर प्रतीक महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करके मुझे बेहद खुशी हुई है. उन्होंने कहा कि देश के कोने-कोने में जहां भी महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए मुझे आमंत्रित किया जाता है, मैं बराबर हर कार्यक्रम में पहुंचता हूं. एक कार्यक्रम को भी मैं छोड़ता नहीं हूं. मैं मानता हूं कि महाराणा प्रताप का शौर्य, त्याग और संघर्ष इतना बड़ा है कि देश उनको कभी भूल नहीं सकता.

राजनाथ सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा ही नहीं थे, बल्कि वह भारत की एक सोच के प्रतीक थे, जो किसी भी कीमत पर अपने आत्मसम्मान और मूल्यों से समझौता नहीं कर सकते थे. अकबर ने तो महाराणा प्रताप से समझौता करने की कोशिश की. अगर महाराणा चाहते थे तो अकबर के साथ समझौता कर लेते और महलों में बहुत ही सुख एवं आनंद से अपनी जिंदगी काट सकते थे, लेकिन उन्होंने महलों का कोमल बिस्तर छोड़कर पत्थरों पर सोना मंजूर किया. उन्होंने महलों का छप्पन भोग छोड़कर घास की रोटी खाकर भारत के स्वाभीमान की रक्षा की, ऐसे थे हमारे महाराणा प्रताप.

रक्षा मंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप ने हर कष्ट सहा, लेकिन कभी-कभी मुगलों के सामने अपने घुटने नहीं टेके और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हल्दी घाटी की भूमि को दुश्मन के खून से लाल कर दिया था. पिछले महीने ही जयपुर में मैंने महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया था. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में बहुत सरकारें आईं और गईं, लेकिन स्वतंत्रता के बाद कुछ सरकारें ऐसी आईं, जहां बच्चों को यह पढ़ाया जाता था कि अकबर महान था, लेकिन मां भारती के सच्चे सपूत महाराणा प्रताप को वह स्थान और सम्मान नहीं दिया गया जो उन्हें मिलना चाहिए था, लेकिन महाराणा प्रताप की वीरता और उनका शौर्य किसी सरकार और इतिहास का मोहताज नहीं है.

उन्होंने कहा कि अकबर भी चला गया और मुगल भी चले गए और उनके वशंजों का भी नामोनिशान मिट गया, लेकिन आज भी हिंदुस्तान के दिलों में महाराणा प्रताप जिंदा हैं. आज भी भारत की माताएं और बहनें अपने बच्चों को महाराणा प्रताप की कहानी सुनाती हैं. महाराणा प्रताप के जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि आजादी की कोई कीमत नहीं होती. देश और देशवासियों के सम्मान और स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं है, और इसी सोच के साथ हमने पिछले 12 सालों में हिंदुस्तान के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम किया है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. पहले जब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत बोलता था तो बातों को इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था, जितना लिया जाना चाहिए था. लेकिन अब अगर भारत बोलता है तो सारी दुनिया कान खोलकर सुनती है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 के पहले आए दिन भारत में कहीं न कहीं आतंकी घटनाएं होती थीं, तब कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष ने आतंकवादियों के मारे जाने पर आंसू बहाए थे. यहां तक कि राहुल गांधी ने तो यह कह दिया था कि हम आतंकी घटनाओं को रोक नहीं सकते, क्योंकि छुटपुट घटनाएं तो होती रहती हैं, लेकिन आज हमने अपने जवानों को खुली छूट दे दी है. कहीं भी आतंकी घटना होती है तो आतंकियों का सफाया होना चाहिए. यहां तक कि आतंकियों को सफाया करने के लिए सीमा के पार भी जाना पड़े तो जाओ.

उन्होंने कहा कि आपने देखा होगा ऑपरेशन सिंदूर. इस बार धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को मारा. दूसरे दिन ही मैंने तीनों सेना अध्यक्षों और अधिकारियों की बैठक बुलाई और बोला कि ऑपरेशन करना है. हम लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठे और मैंने उनके दर्द और मन के उबाल को महसूस किया. और फिर जो कार्रवाई हुई है, वो आप सबने देखी है. आज भी कहना चाहता हूं, पाकिस्तान अगर अपनी नापाक हरकतों को बंद नहीं करता तो अभी तो हमने सिंधु जल समझौते को निरस्त किया है. अभी तो पानी रोका है, लेकिन अब हम पाकिस्तान को दाना-पानी के लिए मोहताज कर देंगे.



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