114 स्कूल बंद! बच्चों की पढ़ाई अधर में,सुल्तानपुर में मर्जिंग से भड़के अभिभावक

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114 स्कूल बंद! बच्चों की पढ़ाई अधर में,सुल्तानपुर में मर्जिंग से भड़के अभिभावक


सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार ने कम छात्र संख्या वाले प्राइमरी स्कूलों का दूसरे विद्यालयों में विलय (मर्जिंग) करने का फैसला लिया है. इस फैसले का मकसद है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुविधाएं मिलें और सरकार के खर्च में भी कटौती हो सके. लेकिन इस फैसले से कई ग्रामीण इलाकों में नाराजगी बढ़ गई है.

स्कूल बंद होने से अभिभावक परेशान
सुल्तानपुर जिले में अब तक 114 प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लग चुके हैं. वहीं कुल 444 स्कूलों के मर्जिंग की योजना है. इन बंद स्कूलों की जगह जिन स्कूलों में बच्चों को भेजा जा रहा है, वे घर से 2 से 4 किलोमीटर दूर हैं. ऐसे में छोटे बच्चों को इतनी दूरी तक पैदल जाना पड़ रहा है.

अभिभावकों ने दर्ज कराई शिकायतें
गांव के संतोष अग्रवाल कहते हैं कि सरकार ने कहा था कि मर्जिंग से पहले ग्रामीणों और अभिभावकों से राय ली जाएगी, लेकिन बिना किसी जानकारी के स्कूल बंद कर दिए गए. गांव में न तो ट्रांसपोर्ट की सुविधा और न ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम है.

रसोइयों और स्टॉफ की बढ़ी चिंता
इस फैसले से स्कूलों में काम करने वाली रसोइयों, चपरासियों और सहायकों की नौकरी पर संकट गहराता जा रहा है. सुल्तानपुर की एक रसोइया ने बताया कि “हमारा रोज़गार छिन जाएगा, अब कहां जाएंगे?”

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रवि शुक्ला ने लोकल18 से बातचीत में कहा कि मर्जिंग से बीएड और बीटीसी किए लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी की उम्मीद भी खत्म होती नजर आ रही है.

सरकार का मकसद खर्च कम करना
सरकार का कहना है कि कई ऐसे स्कूल हैं, जहां सिर्फ 5 या 10 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन उनके लिए पूरा स्टाफ, मिड-डे मील, स्टेशनरी और इमारत का खर्च होता है. ऐसे में इन स्कूलों का मर्ज कर देना आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा.

ग्रामीणों ने क्या कहा?
ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल बंद करने से पहले वैकल्पिक और सुरक्षित ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की जानी चाहिए थी. बच्चों की पढ़ाई, खासकर लड़कियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए थे.



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