26 दिन, 74 गड्ढे और 4700 करोड़ स्वाहा, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर HC की फटकार
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Lucknow-Kanpur Expressway Corruption: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का पोल लगातार खुल रहा है. अब ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ तक पहुंच चुका है. ये एक्सप्रेसवे 4700 करोड़ रुपये की लागत से बना है. उद्घाटन के महज 26 दिनों के भीतर 74 जगहों से ये उखड़ चुका है या फिर गड्ढे हो गए हैं. इसे बनाने में भ्रष्टाचार पर लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका डाली गई थी. इसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को जवाब तलब किया है. इस मामले में सीबीआई या रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की मांग की गई है.
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई. केंद्र और राज्य सरकार को स्पष्टीकरण जारी करने का निर्देश
Lucknow-Kanpur Expressway Corruption: करीब 4,700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता का पोल खुलने लगा है. महज 26 दिनों के भीतर 74 से ज्यादा स्थानों जगहों पर गड्ढे उभरने लगने हैं. पहली बारिश में इस हाई प्रोफाइल एक्सप्रेसवे का ये हाल हो गया है. अब ये मामला तूल पकड़ने लगा है. इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की एंट्री हो गई है. शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को तलब किया है.
जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग को नोटिस जारी किया है. इस याचिका में लगाए गए भ्रष्टाचार के सभी आरोपों पर टू-द-प्वाइंट स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है.
उठी सीबीआई जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. इसकी एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है. याचिका में तर्क दिया गया है कि जिस एक्सप्रेसवे को विश्वस्तरीय मानकों पर बनाने का दावा किया जा रहा था, उसका एक महीने से पहले ही 74 जगहों से टूट जाना सीधे तौर पर निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता और विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है. इस घोटाले की सच्चाई सामने लाने के लिए याचिका में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने, या फिर पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का अनुरोध किया गया है.
भारी-भरकम टोल टैक्स पर भी उठे सवाल
घटिया सड़क और आम जनता से वसूले जा रहे भारी-भरकम टोल पर भी सवाल उठे हैं. याचिकाकर्ता ने एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से वसूले जा रहे टोल टैक्स की दरों को अनुचित बताते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से कम करने की मांग की है. याचिकाकर्ता का कहना है कि जब सड़क की गुणवत्ता ही मानकों पर खरी नहीं उतर रही है और लोगों को सुरक्षित व सुगम सफर नहीं मिल पा रहा है, तो फिर जनता से इतना भारी-भरकम टोल क्यों वसूला जा रहा है?
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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