7 फीसदी यादव, 22% मुसलमान, मौलाना ने अखिलेश यादव को किस गणित में उलझा दिया?
Last Updated:
Uttar Pradesh Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से अखिलेश यादव को तगड़ा झटका लगा है. चुनाव से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को पत्र लिखा चेतावनी दिया है. पत्र में 7% यादव बनाम 22% मुस्लिम आबादी का चुनावी गणित समझाते हुए मांग की गई है कि आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी को किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए. मौलाना ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के भारी समर्थन से मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सत्ता में पहुंचे, लेकिन हमेशा मुसलमानों का सिर्फ इस्तेमाल हुआ.
समाजवादी पार्टी के मुखिया को आगामी चुनाव में तगड़ा झटका लगने वाला है.
Uttar Pradesh Election Hurdles for Akhilesh Yadav: ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में ‘माई’ (MY – Muslim-Yadav) समीकरण समाजवादी पार्टी के हाथ से फिसलते जा रहा है. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस किले की नींव दरकती नजर आ रही है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को एक अत्यंत संवेदनशील और राजनीतिक रूप से दबाव बनाने वाला पत्र लिखा है. आधिकारिक लेटरहेड पर अखिलेश यादव से मुस्लिम मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की सीधी मांग की गई है. मौलाना ने इस पत्र और अपने बयान में जो 7% बनाम 22% का जो गणित पेश किया है, उसने अखिलेश यादव की पेशानी पर बल ला दिए हैं.
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने अपने वीडियो बयान और पत्र में बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के लाखों मुसलमानों के जज्बात अब बदल रहे हैं. उन्होंने इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि मुसलमानों ने हमेशा झोली भर-भरकर समाजवादी पार्टी को वोट दिया. इसी समर्थन के दम पर दिवंगत मुलायम सिंह यादव और स्वयं अखिलेश यादव कई बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे. इतना ही नहीं, मुस्लिम वोट बैंक की बदौलत ही अखिलेश के भाई, चाचा, पत्नी, भतीजे और परिवार के अन्य सदस्य विधानसभा और लोकसभा की सीढ़ियां चढ़ने में कामयाब रहे. मौलाना का आरोप है कि इतने वफादार समर्थन के बावजूद हर बार टिकट बंटवारे और सत्ता में हिस्सेदारी के समय मुस्लिम आबादी के प्रतिशत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है.
7% बनाम 22% का खतरनाक गणित
अखिलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौलाना द्वारा पेश किया गया जनसंख्या का वह समीकरण है, जो सपा के कोर वोट बैंक की दुखती रग पर हाथ रखता है. मौलाना शहाबुद्दीन ने साफ तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश में यादव बिरादरी की आबादी महज 7 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम समुदाय की आबादी 22 प्रतिशत है. लोकतांत्रिक और संख्याबल के हिसाब से देखा जाए तो मुसलमानों का हक कहीं ज्यादा बनता है. इसलिए सपा को अब यह एलान करना ही होगा कि 2027 में चुनाव जीतने के बाद उनका मुख्यमंत्री कोई मुस्लिम चेहरा होगा. मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह यह नहीं कह रहे कि अमुक व्यक्ति को ही बनाओ, बल्कि सपा के भीतर मौजूद किसी भी काबिल मुस्लिम नेता को आगे लाया जाना चाहिए.
अखिलेश यादव को क्या हो सकती है दिक्कत?
वोट बैंक में बिखराव का खतरा: यदि अखिलेश यादव इस मांग को सिरे से खारिज करते हैं, तो मुस्लिम वोट बैंक में यह संदेश जाएगा कि सपा केवल उनके वोटों का इस्तेमाल अपनी सत्ता के लिए करती है. इससे मुस्लिम वोटों में बिखराव आ सकता है और वे अन्य विकल्पों (जैसे बसपा या कांग्रेस) की तरफ रुख कर सकते हैं.
- सपा की मूल विचारधारा पर संकट: यदि अखिलेश किसी मुस्लिम चेहरे को आगे बढ़ाते हैं, तो उनका जो पारंपरिक गैर-यादव पिछड़ा या हिंदू मतदाता वर्ग है, वह ध्रुवीकरण के कारण पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ शिफ्ट हो सकता है. यह सपा के लिए ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ जैसी स्थिति है.
- ब्लैकमेलिंग की राजनीति की शुरुआत: चुनाव से ऐन पहले इस तरह की मांग उठने से पार्टी के भीतर अन्य जातियों और समुदायों से भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं, जिससे टिकट बंटवारे और सांगठनिक संतुलन बनाना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
About the Author

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें