चूड़ियों की खनक के पीछे संघर्ष की आवाज! जोखिम उठाकर भी मुश्किल से चलता है घर
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फिरोजाबाद की चमचमाती कांच की चूड़ियां जितनी खूबसूरत दिखती हैं, उन्हें बनाने की प्रक्रिया उतनी ही जोखिम भरी होती है. ग्राइंडर से कटिंग करने वाले कारीगर घंटों मेहनत करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बेहद कम मजदूरी मिलती है.
फिरोजाबाद: यूपी का फिरोजाबाद शहर कांच की चूड़ियों के लिए प्रसिद्ध है. यहां घर-घर में कांच की चूड़ियां तैयार होती है. कारखाने से लेकर शहर की गलियों में चूड़ियों की खनक सुनाई देती है. लेकिन इन चूड़ियों को बड़ी मेहनत से तैयार किया जाता है.

इन चूड़ियों को तैयार करने के लिए कारखाने से लाने के बाद कटिंग की जाती है जो काफी रिस्की है. फिर इसके बाद उन्हें सजाया जाता है.वही इस काम के लिए कारीगरों को बेहद कम मजदूरी मिलती है.

फिरोजाबाद के रसूलपुर में चूड़ियों की कटिंग करने वाले कारीगर मोहम्मद अशरफ ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि चूड़ियों का यह काम बेहद ही रिस्की है. सबसे पहले कारखाने से सादा चूड़ियों को कटिंग के लिए लाया जाता है फिर कारीगर कटिंग के लिए तैयार करते हैं.
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कांच की चूड़ियों को ग्राइंडर से कटिंग कर नई डिजाइन में तैयार किया जाता है. कारीगर ग्राइंडर की मदद से कांच की चूड़ियां पर अलग-अलग तरह की डिजाइन बनाते हैं. कई बार कांच की यह चूड़ियां टूटती है लेकिन कारीगर रिस्क लेकर इन चूड़ियों को कटिंग कर तैयार करते हैं. वही कटिंग होने के बाद यह चूड़ियां मार्केट में सजने के लिए जाती हैं. कटिंग वाली जगह पर दूसरे कारीगर गोल्डन कलर की पॉलिश लगाते हैं इससे इनकी चमक और भी अलग दिखाई देती है.

चूड़ी कटिंग करने वाले कारीगर ने बताया कि रोजाना चूड़ियों के गुच्छों को इस अड्डे पर लाया जाता है और उससे चूड़ियों पर कटिंग होती है. इस काम को कारीगर दिन भर करते हैं. लगभग 1 घंटे में 320 चूड़ियां कटिंग होकर तैयार हो जाती हैं.

इसके लिए कारीगरों को ₹50 से लेकर डेढ़ सौ रुपए तक की मजदूरी ही मिल पाती है. अगर काम अच्छा चलता है तो एक कारीगर रोजाना ज्यादा से ज्यादा ₹300 कमा लेता है जिससे उसका गुजारा भी नहीं हो पाता.