Health: बाढ़ के बाद गर्भवती महिलाओं पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा, ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

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Health: बाढ़ के बाद गर्भवती महिलाओं पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा, ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं


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Health Tips For Pregnant Woman: गायनी एक्सपर्ट डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए बेहद खतरनाक हैं.

नोएडा: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यमुना से लगे इलाकों और आसपास के गांव हाल ही में आई बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हुए. घरों में पानी घुसने से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और अब जैसे-जैसे पानी उतर रहा है, तमाम बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है. अस्पतालों में ओपीडी फुल है और ज्यादातर डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी जलजनित बीमारियों वाले मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं. वहीं मच्छरों के बढ़ने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां भी लोगों को अपनी चपेट में लेने लगी हैं.

इन बीमारियों से हो सकता ये खतरा पैदा
इस दौरान, सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं पर मंडरा रहा है. सेक्टर-110 स्थित सीएचसी भंगेल में तैनात गायनी एक्सपर्ट डॉ. मीरा पाठक ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए बेहद खतरनाक हैं. इन बीमारियों की वजह से समय से पहले डिलीवरी, गर्भपात या बच्चे में गंभीर संक्रमण तक हो सकता है. यही कारण है कि ऐसी परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं को बहुत ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है.

अगर ये दिखें लक्षण तो तुरंत करें डॉक्टर से संपर्क
डॉ. पाठक का कहना है कि गर्भवती महिलाएं बुखार, शरीर पर चकत्ते, तेज सिरदर्द, उल्टी-दस्त, पीलिया या पेशाब कम होने जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें. इन लक्षणों की अनदेखी भारी पड़ सकती है. खाने-पीने में केवल उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें और सड़क का खाना या बिना धोए कोई फल या कच्चा सलाद खाने से बचें. ताजा और घर का बना हुआ भोजन ही सबसे सुरक्षित है. इसके साथ ही दूध और जूस तभी पिएं जब उसकी क्वालिटी पर पूरा भरोसा हो.

कुछ इस तरह बरतें सावधानियां
उन्होंने यह भी कहा कि अगर घर या आसपास पानी जमा हो और बदबू या गंदगी फैली हो तो गर्भवती महिलाओं को मास्क पहनाएं, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करने और रहने की जगह को क्लोरीन या फिनाइल से साफ कर दें. परिवार के सहयोग और समय पर मेडिकल चेकअप बेहद जरूरी हैं. एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर या शुगर जैसी समस्याएं इसी दौरान पकड़ में आती हैं. वैक्सीन जैसे टिटनस और फ्लू का समय पर लगना भी मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है. डॉ. पाठक ने साफ कहा कि साफ पानी, स्वच्छ भोजन और मच्छरों से बचाव को प्राथमिकता देना ही बाढ़ के बाद गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को सुरक्षित रहने के लिए खास उपाय होंगे.

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