Potato Farming : आलू बुवाई के लिए फॉलो करें ये जरूरी टिप्स, जानें इसकी खेती का पूरा तरीका

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Potato Farming : आलू बुवाई के लिए फॉलो करें ये जरूरी टिप्स, जानें इसकी खेती का पूरा तरीका


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Potato cultivation tips : आलू की बुवाई का समय निकट है. किसानों ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है. आलू अपने यहां सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जी है. इसलिए डिमांड खूब रहती है. किसान कुछ बातों का ध्यान रखें, तो पैसे पीट सकते हैं.

रायबरेली. आलू भारत की सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जियों में से एक है. ये किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में बड़ी अहमियत रखता है. अगर बुआई से पहले सही तरीके अपनाए जाएं तो आलू की पैदावार कई गुना बढ़ाई जा सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि खेत की तैयारी, बीज का चयन और मिट्टी की उर्वरता इस फसल की पैदावार बढ़ाने में कारगर है. आइए जानते हैं आखिर आलू की बुवाई से पहले खेत को किस तरह तैयार करें? उद्यानिक क्षेत्र में 25 साल का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह (बीएससी एग्रीकल्चर इलाहाबाद विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बताते हैं कि अगर किसान बुआई से पहले खेत की सही तैयारी करें, स्वस्थ बीज चुनें, उन्हें उपचारित करें और उचित समय पर बुआई करें, तो आलू की फसल से बंपर उत्पादन आसानी से हासिल किया जा सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक तकनीक अपनाने वाले किसान हर साल दूसरे किसानों से ज्यादा मुनाफा कमाते हैं.

इस तरह तैयार करें खेत

नरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि आलू की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो. बुआई से पहले खेत की गहरी जुताई कर लें और उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट डालें. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है. खेत को समतल करना और मेड़ों की अच्छी तरह तैयारी करना भी जरूरी है, ताकि पानी कहीं रुके नहीं.

इन किस्मों के बीजों का चयन 

आलू की बुआई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त बीज कंदों का चयन करना चाहिए. सामान्यतः 25-50 ग्राम वजन वाले कंद बीज के रूप में सबसे अच्छे माने जाते हैं. बीज को सीधे बोने से पहले 10-15 दिन तक छायादार स्थान पर रखकर उन्हें अंकुरित कर लेना चाहिए. अंकुरित बीज लगाने से पौधों की बढ़वार तेज होती है और उत्पादन ज्यादा मिलता है. बीज को फफूंदनाशक दवा जैसे कार्बेन्डाजिम या मैनकोजेब के घोल में उपचारित करना चाहिए. इससे बीज रोगों से सुरक्षित रहते हैं और पौधों पर झुलसा या गलन जैसी बीमारियां नहीं आती हैं.

कैसी होना चाहिए खाद 
बुआई से पहले किसानों को मौसम का ध्यान रखना भी जरूरी है. आलू की बुआई अक्टूबर से नवंबर के बीच सबसे उपयुक्त रहती है, जब तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस हो. इस समय आलू का अंकुरण अच्छा होता है और पौधे तेजी से विकसित होते हैं. अच्छी पैदावार के लिए बुआई से पहले खेत में समय पर संतुलित उर्वरक का प्रयोग भी जरूरी है. नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की सही मात्रा डालने से आलू की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं. किसान चाहें तो साथ में जैविक खाद और नीम की खली का भी प्रयोग कर सकते हैं.

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें

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