Pumpkin Farming : ये कद्दू भगाएगा कैंसर! अयोध्या के कृषि विश्वविद्यालय ने तैयार की नई किस्म, मात्र डेढ़ फीट फैलेगा पौधा
Last Updated:
New Variety Pumpkin : ये कद्दू कमाल का है. कम समय में अधिक पैदावार, कम जगह में खेती और जबरदस्त पोषण, ये सभी गुण इसे खास बनाते हैं. कद्दू के ये वैरायटी पोषण, उत्पादन क्षमता और ऑफ-सीजन खेती तीनों नजरिये से किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है. इस किस्म का विकास अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आस्तिक झा ने किया है. लोकल 18 से बात करते हुए डॉ. झा कहते हैं कि इसकी बुवाई अक्टूबर में की जाती है. करीब 70 दिनों में फल आना शुरू हो जाता है. यह किस्म छोटे और सीमांत किसानों की किस्मत बदल सकती है.
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) ने सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग की ओर से विलायती कद्दू की एक नई उन्नत किस्म विकसित की गई है. ये कद्दू पोषण, उत्पादन क्षमता और ऑफ-सीजन खेती तीनों दृष्टि से किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है. इस किस्म का विकास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आस्तिक झा की ओर से किया गया है.

पोषण की दृष्टि से भी यह विलायती कद्दू अत्यंत समृद्ध है. इसमें कैंसर रोधी तत्व पाए जाते हैं. इसमें पोटेशियम, फॉस्फोरस, आयरन, विटामिन ए और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सेवन से यह सब्जी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है. बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ने की संभावना है.

खेती के लिहाज से यह किस्म किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है. डॉ. झा ने बताया कि इस कद्दू की बुवाई अक्टूबर महीने में की जाती है और करीब 70 दिनों में फल आना शुरू हो जाता है. सर्दियों के मौसम में, जब आमतौर पर कद्दू जैसी सब्जियां बाजार में उपलब्ध नहीं होतीं, उस समय यह किस्म उत्पादन देती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

इससे किसानों को ऑफ-सीजन में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है और उनकी आर्थिक आय में वृद्धि होती है. डॉ. आस्तिक झा के अनुसार, यह विलायती कद्दू सामान्य कद्दू से बिल्कुल अलग है. यह लता विहीन (बेल रहित) किस्म है, जो केवल डेढ़ फीट क्षेत्र में फैलती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही पौधे में चार से पांच फल लगते हैं, जिससे कम जगह में अधिक उत्पादन संभव हो पाता है. यह किस्म छोटे और सीमांत किसानों की किस्मत पलट सकती है.

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस नई किस्म को इसी वर्ष सब्जी किस्म रिलीज कमेटी से अनुमोदन (अप्रूवल) मिलने की उम्मीद है. अप्रूवल के बाद इसे पूर्वांचल की प्रमुख सब्जी के रूप में जारी किया जाएगा. इससे न केवल क्षेत्रीय किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि पूर्वांचल में सब्जी उत्पादन के नए द्वार भी खुलेंगे.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि विलायती कद्दू की यह नई किस्म बदलते मौसम और बाजार की जरूरतों के अनुरूप है. कम समय में अधिक उत्पादन, कम जगह में खेती और बेहतर पोषण, ये सभी गुण इसे भविष्य की एक महत्त्वपूर्ण सब्जी बनाते हैं, आने वाले समय में यह किस्म किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प उपलब्ध कराएगी.