Sugarcane farming tips: एक बार बुवाई, दो बार फसल की कटाई, ऐसे करें गन्ने की खेती मिलेगा दोहरा मुनाफा
फर्रुखाबाद: आधुनिकता के इस दौर में कृषि के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोग किसानों के लिए समृद्धि का द्वार खोल रहे है. फर्रुखाबाद के कई किसान परंपरागत खेती से नाता तोड़कर अब नगदी फसल की ओर रुख कर चुके हैं. ऐसे ही प्रगतिशील किसानों की श्रेणी में भी शामिल हो चुके हैं. क्षेत्र के निवासी किसान इस बार अपने खेतों में अलग ढंग से खेती कर रहे हैं. जिससे इन्हे अब फसलों में नुकसान को छोड़ लाखों रुपए का मुनाफा हो रहा है. जिस प्रकार छोटे स्तर पर गन्ने की खेती शुरू की आज बड़े स्तर पर इस क्षेत्र में गन्ना की फसल तैयार हुई है.
40 फीसदी खेती पर हैं निर्भर
जिले में यहां की 40 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गन्ने की खेती पर निर्भर है. जिले के किसानों की मेहनत और नई तकनीक अपनाने की सोच ने फर्रुखाबाद को प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में गन्ना उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है. वहीं सदर तहसील क्षेत्र के कायमगंज गांव के प्रगतिशील किसान ने गन्ने की नई प्रजाति Cos 16202 की खेती कर एक मिसाल पेश की है.
यह गन्ने के जानकार पांच वर्षों से गन्ने की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि गन्ने की पारंपरिक खेती के बजाय जब उन्होंने नई प्रजाति की खेती शुरू की, तो न केवल उत्पादन बढ़ा बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ गया. इस समय उनके पास करीब 20 एकड़ में गन्ने की प्रजाति Co 16202 की फसल खड़ी है. यह किस्म ऊंची उपज देने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधी भी है और खेत में लंबे समय तक खड़ी रहने पर भी इसके रस की गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ता.
बंपर पैदावार वाली किस्मों को उगाते है किसान
गन्ना अधिकारी बताते हैं कि गन्ने की उन्नत किस्म को ही खेत में उगाते हैं. 0238, 980214, 94184, यह किस्मों में निकलता है. अधिक रस के साथ वजन ही भी अच्छा मिलता है. जिससे बंपर पैदावार होती है.बीज तैयार होने के बाद क्षेत्र के अन्य किसानों को भी बिक्री करते हैं. दूसरी गन्ने की फसल की अपेक्षा यहां पर कम सिंचाई मेंगन्ने की फसल तैयार होती है. वही इस समय 350 रुपए प्रति कुंतल की दर सेगन्ने की बिक्री होती है. वही प्रत्येक एक बीघा में कम से कम 50 कुंतल तक की पैदावार हो जाती है. वही जब कटाई की जाती है तो गन्ने को अलग करने के बाद इनके पत्तो को मवेशियों के चारे के लिएइस्तेमाल करते हैं.
गन्ने की खेती का क्या है तरीका
कुलदीप किसान बताते है की प्रति बीघा में भूमि में उर्वरता के अनुसार तीन हजार से पांच हजार रुपए की लागत लगाते हैं. वही एक फुट प्रति बीज लाइन से बुआई के बाद समय से सिंचाई करते हैं. जिससे की पर्याप्त नमी बनी रहे.इस समय आमतौर पर साठ हजार रुपए से एक लाख रुपए का लाभ कमा रहे है.
उन्होंने बताया कि वे अपने गन्ने की यह प्रजाति चीनी मिलों को नहीं बेचते, बल्कि बीज के रूप में ही किसानों को आपूर्ति करते हैं. आज उनके पास प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी बीज की मांग आ रही है. प्रदीप शुक्ला का कहना है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक और उन्नत प्रजातियों को अपनाएं तो खेती में नुकसान की कोई गुंजाइश नहीं रहती. गन्ने की इस नई किस्म ने मेरी किस्मत ही बदल दी है. पहले जहां एक एकड़ में सीमित उत्पादन होता था, अब दोगुनी पैदावार मिल रही है.
एक फसल से दो बार कटिंग
जहां एक ओर किसान गन्ने को नुकसान की खेती बताते हैं. वही कुलदीप ने बताया की हम कई वर्षो से लगातार अपने खेतों में गन्ने की फसल ही उगा रहे हैं. वही जब गन्ना तैयार हो जाता है तो रूपापुर चीनी मिल में बिक्री कर देते है. आमतौर पर यहां के किसान गन्ने की अच्छी किस्म की बुआई करते है. जिससे एक फसल से दो बार कटिंग करके डबल कमाई भी कर रहे हैं.जब फसल तैयार हो जाती है. तो यहां के किसान संयुक्त रूप से फसल की कटाई करते हैं. जिससे कम समय में ही फसल की बिक्री हो जाती है.
मांग बढ़ने पर घटा दी कीमत
इस गन्ने के बीज की बिक्री ₹2000 प्रति क्विंटल के हिसाब से की थी. लेकिन जैसे-जैसे यह किस्म लोकप्रिय होती गई और किसानों में इसकी मांग बढ़ी, अब यह बीज ₹700 प्रति क्विंटल में उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रदीप शुक्ला का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक किसानों को बेहतर किस्म का बीज उपलब्ध कराना है ताकि वे भी उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने का उत्पादन कर सकें.