UPSC में नहीं मिली सफलता, 18 हजार से शुरू की नौकरी, हरमिंदर कौर आज अपनी कंपनी की हैं सीईओ
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Success story: हरमिंदर कौर लोकल 18 से बताती हैं कि उन्होंने करीब आठ वर्षों तक यूपीएससी की तैयारी की. लगातार मेहनत के बावजूद जब सफलता नहीं मिली तो उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया. उनका कहना है कि यूपीएससी की तैयारी इंसान को इतना सक्षम बना देती है कि वह जीवन में किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है. कहा कि असफलता से कभी डरना नहीं चाहिए. यदि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ा जाए तो हर अनुभव इंसान को कुछ नया सिखाता है. यही सोच उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही.
बरेली: बरेली के मॉडल टाउन की निवासी हरमिंदर कौर आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं, जो असफलता के बाद अपने सपनों को छोड़ देते हैं. पढ़ाई में रुचि रखने वाली हरमिंदर ने करीब आठ वर्षों तक यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की, 6 बार एग्जाम दिया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपने अनुभव और सीख को नई दिशा दी और आज हरनिध कैपिटल फाइनेंसियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की फाउंडर और सीईओ हैं. महीने में कई युवाओं को ट्रेंड कर रोजगार देती है.
18 हजार से शुरू की नौकरी
हरमिंदर कौर लोकल 18 से बताती हैं कि उन्होंने करीब आठ वर्षों तक यूपीएससी की तैयारी की. लगातार मेहनत के बावजूद जब सफलता नहीं मिली तो उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया. उनका कहना है कि यूपीएससी की तैयारी इंसान को इतना सक्षम बना देती है कि वह जीवन में किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है. कहा कि असफलता से कभी डरना नहीं चाहिए. यदि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ा जाए तो हर अनुभव इंसान को कुछ नया सिखाता है. यही सोच उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही.
यूपीएससी की तैयारी के बाद उन्होंने 18 हजार रुपये की नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की. वह कंटेंट राइटर के रूप में काम करने लगीं. इसी दौरान उन्होंने खुद को नए क्षेत्रों में सीखने के लिए तैयार रखा. बाद में उन्हें एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करने का अवसर मिला जहां उन्होंने निवेश, इंश्योरेंस और फाइनेंस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं.
फाइनेंस सेक्टर का अनुभव आया काम
हरमिंदर कौर ने बताया कि फाइनेंस सेक्टर में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने अपने शहर बरेली लौटकर हरनिध कैपिटल फाइनेंसियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की. उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं बल्कि लोगों तक वित्तीय जागरूकता पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि आज भी पूरे देश में करोड़ों लोगों को लोन, ईएमआई और निवेश जैसी बुनियादी वित्तीय जानकारी नहीं है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि लोगों तक सही जानकारी और सही फाइनेंशियल प्रोडक्ट पहुंचाए जाएं.
हरमिंदर कौर की कहानी यह साबित करती है कि असफलता अंत नहीं होती. सही सोच और लगातार सीखने की इच्छा इंसान को नई राह दिखा सकती है. बरेली से शुरू हुई उनकी यह पहल आज युवाओं और समाज दोनों के लिए प्रेरणा बन रही है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें