आजमगढ़ के इस गांव की बदहाल स्थिति, लोग बोले- अब नहीं तो कब?
आजमगढ़: देश में जहां एक तरफ बड़े-बड़े हाईवेज और एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है, कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और लोगों के सफर को आसान बनाने के लिए सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. वहीं 21वीं सदी में आजमगढ़ जिले में एक ऐसा गांव भी है, जहां आज भी लोग 19वीं सदी में भी दंश झेलने को मजबूर हैं. जहां सरकार की ओर से शहर से लेकर गांव तक चौड़ी पक्की सड़क बनाने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर इस गांव में आज भी लोग पगडंडी पर निर्भर हैं. लोगों की ओर से इस गांव से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को पार करने के लिए स्थानीय लोगों की ओर से ही बनाए गए लकड़ी के जर्जर हो चुके पुल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
यह नजारा है आजमगढ़ जनपद के सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत कोल ककराहटा गांव का, जहां लोगों के लिए दैनिक जीवन किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं है. कोल गांव के बगल में ही आजमगढ़ जनपद का मुबारकपुर कस्बा शुरू होता है, जो तमसा नदी के दूसरे छोर पर मौजूद है. लोग वहां तक पहुंचने के लिए पगडंडियों और तमसा नदी पर बने हुए लकड़ी व बांस के एक जर्जर अस्थाई पुल पर निर्भर हैं. कोल गांव और दाउदपुर कुर्मी गांव के बीच से गुजरने वाली तमसा नदी के किनारे हर दिन सैकड़ों लोग अपनी जान हथेली पर रखकर इस नदी को पार करते हैं. गांव तक पहुंचने या बाहर जाने के लिए ग्रामीणों के पास पुल पार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है.
जरा सी लापरवाही ले सकती है जान
ऐसे में मजबूरन गांव के हर उम्र के लोग चाहे वह बुजुर्ग हो महिला हो या बच्चों को स्कूल जाना हो, उनके लिए तमसा नदी पर बना हुआ यह इकलौता जर्जर हिलता-डुलता बांस और लकड़ी से बना अस्थाई पुल ही सहारा है. सबसे खास बात यह है कि नदी के दूसरे छोर पर स्कूल है, जहां तक पहुंचने के लिए बच्चों को अपने पीठ पर भारी भरकम बैग लादकर इस जर्जर लकड़ी के पुल को पार करना होता है. स्थिति ऐसी है कि जरा सी चूक या फिसलने पर सीधे तमसा नदी के गहरे पानी में गिरने का डर हमेशा बना रहता है. सरकार अब निर्माण नहीं करेगी तो कब करेगी
बारिश में बढ़ जाता है तमसा नदी का जलस्तर
वहीं लोगों को सबसे अधिक समस्या तब उठानी पड़ती है, जब बरसात का मौसम शुरू होता है. बारिश के दिनों में तमसा नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और नदी पर बनाया गया यह लकड़ी का पुल लगभग पूरी तरह से नदी में समा जाता है. पुल के डूब जाने से गांव का संपर्क दूसरे छोर से पूरी तरह से कट जाता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले कई बार यह पुल टूट भी चुका है, जिसके कारण कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं.
ऐसा नहीं है कि इस नदी पर पुल बनाने के लिए गांव वालों ने कहीं गुहार नहीं लगाई गई, इस नदी पर पुल बनाए जाने की मांग कई वर्षों पुरानी है. स्थानीय लोगों की ओर से शासन-प्रशासन से इस जगह पर पुल बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है. इस गांव में पुल का निर्माण ना हो पाने के कारण स्थानीय लोगों की ओर से बीते 2024 के लोकसभा चुनाव में वोटिंग का बहिष्कार भी किया जा चुका है, लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवाय आज तक कुछ भी हासिल नहीं हो सका है.
गांव के 4 से 5 हजार लोग प्रभावित
स्थानीय निवासी श्याम गौतम लोकल18 से बातचीत करते हुए बताते हैं कि इस गांव में नदी पर पुल बनाने की मांग लगभग तीन पीढ़ी पुरानी है. उन्होंने बताया कि पुल निर्माण के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक गुहार लगाई जा चुकी है. ग्रामीणों की ओर से हर सरकार में इस गांव में पुल निर्माण की मांग की जाती रही है, लेकिन आज तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी. उन्होंने बताया कि कई बार पुल निर्माण के लिए शासन की ओर से बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है, लेकिन आज तक धरातल पर कोई काम नजर नहीं आया. उन्होंने बताया कि पुल का निर्माण न होने से गांव और आसपास के क्षेत्र के लगभग 4 से 5 हजार लोग प्रभावित है.
लकड़ी का पुल बना लोगों का सहारा
वही गांव के स्थानीय निवासी विनोद का कहना है कि पुल न होने से अक्सर लोग हादसे का शिकार होते रहते हैं और नदी में गिर के घायल होते रहते हैं. गांव के निवासी नितिन बताते हैं कि सबसे अधिक समस्या बच्चों को स्कूल पहुंचने में होती है. बारिश के वक्त जब नदी का जलस्तर बढ़ता है. उस दौरान सबसे अधिक खतरे की स्थिति बनी रहती है. स्थानीय निवासी जैसराज कुमार बताते हैं कि पुल का निर्माण न होने से कई घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं. वर्तमान में नदी पर बना हुआ लकड़ी का यह पुल क्षेत्र के साहनी समाज के लोगों की ओर से बनाया गया है. ऐसे में इसका उपयोग करने के लिए गांव वालों को उन्हें पैसे भी देने पड़ते हैं. हर बार पुल इस्तेमाल करने पर लोगों को 15 से 20 रुपए तक देने होते हैं.
बड़े-बड़े दावे, लेकिन स्थिति कुछ और
ऐसे में जहां एक तरफ देशभर में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ लोगों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हो, लेकिन आजमगढ़ जिले के कोल ककरहटा गांव की यह तस्वीर स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ यहां के जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर चुनाव में लोगों की ओर से पक्के पुल की मांग उठाई जाती है, लेकिन जनप्रतिनिधि केवल वोट मांगने के समय पुल बनवाने का वादा करते हैं और चुनाव खत्म होते ही गायब हो जाते हैं. ग्रामीणों की मांग है कि गांव में जल्द से जल्द पक्के पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि यहां के स्थानीय लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके.