कान के मैल से छुटकारा पाएं, आयुर्वेदिक ‘कर्णपूरण’ से करें सफाई, लेकिन डॉक्टर से जरूर ले सलाह
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Saharanpur Latest News: सहारनपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पहली बार पंचकर्म चिकित्सा पद्धति “कर्णपूरण” से कान की सफाई की जा रही है. डॉक्टर हर्ष ने बताया कि यह विधि कान के मैल को सुरक्षित तरीके से निकालत…और पढ़ें
मात्र ₹500 में इस आयुर्वेदिक विधि कराएं अपने कानों की सफाई
सहारनपुर. अक्सर देखने में आ रहा है कि कुछ लोगों को अपने कानों से कम सुनाई देने लगा है. जिसका एक मुख्य कारण कानों के अंदर जमा हुआ मैल भी होता है लेकिन उस मैल को साफ करने के लिए कुछ लोग विभिन्न तरह की स्टिकस का इस्तेमाल करते हैं. जो कान को काफी नुकसान भी पहुंचा सकती है. तो आज हम आपको सहारनपुर में पहली बार आई पंचकर्म चिकित्सा पद्धति में से एक “कर्णपूरण” विधि से कान का मैल साफ करने के बारे में बताने जा रहे है जो आपको सहारनपुर के दिल्ली रोड स्थित आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय की जा रही है.
आपको बता दे कि कान साफ करने की विधि को आयुर्वेद में “कर्णपूरण” कहते हैं. यह पंचकर्म चिकित्सा पद्धति का एक हिस्सा है, जिसमें तेल या औषधीय तेल का उपयोग करके कान की सफाई की जाती है. आयुर्वेदिक तेल जैसे कि नारियल तेल, बादाम तेल, जैतून का तेल, दशमूल तेल, बिरवारी तेल या विशेष हर्बल तेल का उपयोग किया जाता है. तेल को हल्का गर्म किया जाता है. एक ड्रॉपर या रुई की मदद से तेल को कान में डाला जाता है. सिर को एक तरफ झुका कर कुछ देर तक तेल को कान में रहने दिया जाता है. इसके बाद कान में जमा सारा मैल बाहर निकल आता है और कान पूरे तरीके से साफ हो जाता है. यह थैरेपी सहारनपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर मात्र 500 रुपये में की जा रही है.
मात्र ₹500 में इस आयुर्वेदिक विधि कराएं अपने कानों की सफाई
आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बी.ए.एम.एस, एम.डी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि कुछ लोगों को कान से कम सुनने लगता है. जिसका एक कारण कान के अंदर जमा हुआ मैल भी होता है. लेकिन उस मैल को निकालने के लिए कुछ लोग विभिन्न तरह की दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं या फिर कुछ ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं जिससे कान को काफी नुकसान हो जाता है. वहीं आयुर्वेद में कान साफ करने की विधि को “कर्णपूरण” कहा जाता है.
जिसमें विभिन्न प्रकार के आयुर्वेद तेलों जैसे सरसों का तेल, नारियल का तेल, बदाम का तेल, हर्बल का तेल, जैतून का तेल, दशमूल तेल, बिरवारी तेल आदि को हल्का गर्म करके इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन अगर आप घर पर अपने कान साफ कर रहे हैं तो कृपया इन सभी तेलों का इस्तेमाल करने से पहले अपने पास के कान से संबंधित आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क जरुर कर ले या फिर आयुर्वेद डॉक्टर के पास जाकर “कर्णपूरण” विधि से ही अपने कानों की सफाई कराएं. वहीं अगर किसी के कान के परदे में छेद है तो वह इस विधि का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें. अगर आप इस विधि का घर पर इस्तेमाल करना भी चाहते हैं तो हल्का गर्म तेल की 5 से 10 बूंद को कान में डालें और उसको फिर अच्छे से रुई के माध्यम से साफ कर ले.
न्यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.
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