चित्रकूट के रामनगर में 10 करोड़ से राजकीय मानसिक दिव्यांग आश्रय गृह बनकर तैयार, जाने
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चित्रकूट जिले के रामनगर क्षेत्र में राजकीय मानसिक दिव्यांग आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण पूरा हो चुका है. यह केंद्र चित्रकूट, बांदा और झांसी मंडल सहित आसपास के कई जिलों के मानसिक दिव्यांग युवाओं के लिए प्रशिक्षण और आवास की सुविधा उपलब्ध कराएगा,इस परियोजना पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए है. केंद्र में युवाओं को विभिन्न प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे भविष्य में स्वयं रोजगार स्थापित कर सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें
चित्रकूटः जिले में मानसिक दिव्यांग मानसिक रूप से विशेष आवश्यकता वाले युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है.इस पहल के तहत न केवल चित्रकूट बल्कि आसपास के कई जिलों के युवाओं को भी विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाएंगे, जिससे वे कोई हुनर सीखकर अपना रोजगार शुरू कर सकें. इसका उद्देश्य ऐसे युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है.
प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण हो चुका है पूरा
आप को बता दे कि चित्रकूट जिले के रामनगर क्षेत्र में राजकीय मानसिक दिव्यांग आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण पूरा हो चुका है. यह केंद्र चित्रकूट, बांदा और झांसी मंडल सहित आसपास के कई जिलों के मानसिक दिव्यांग युवाओं के लिए प्रशिक्षण और आवास की सुविधा उपलब्ध कराएगा,इस परियोजना पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए है. केंद्र में युवाओं को विभिन्न प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे भविष्य में स्वयं रोजगार स्थापित कर सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें. इस प्रशिक्षण केंद्र में मानसिक दिव्यांग युवाओं को मोमबत्ती, अगरबत्ती, लिफाफा, खिलौने और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये युवा छोटे स्तर पर अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा.
50 बालकों के लिए है इंतजाम
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी प्रियंका यादव ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि केंद्र के संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ की भी व्यवस्था की जा रही है. यहां एक अधीक्षक, तीन स्पेशल एजुकेटर, एक व्यावसायिक प्रशिक्षक, एक योग प्रशिक्षक, नर्स सहित कुल 22 कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी. केंद्र में 50 बालकों के रहने की व्यवस्था की गई है. जहां उन्हें सुरक्षित वातावरण में प्रशिक्षण और देखभाल दोनों उपलब्ध कराई जाएंगी.
जिले के रामनगर स्थित यह केंद्र पूरी तरह तैयार हो चुका है और जल्द ही इसका संचालन शुरू किया जाएगा. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि अब तक 25 मानसिक दिव्यांग बालकों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है. इनमें पांच निराश्रित बालक हैं, जबकि अन्य अपने परिजनों के साथ रह रहे हैं. सभी पात्र बालकों का पुलिस सत्यापन और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद उन्हें केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें