जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को लगाएं इन खास चीजों का भोग, घर में आएगी खुशहाली…

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जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को लगाएं इन खास चीजों का भोग, घर में आएगी खुशहाली…


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Krishna Janmashtami 2025: मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. पंडित अजय तैलंग के अनुसार, जन्माष्टमी की पूजा में माखन मिश्री, धनिया पंजीरी, चावल की खीर और खीरा का भोग जरूरी …और पढ़ें

मथुरा: पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इसका महत्व और भी खास है. यहां श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को दिव्यता और भव्यता से सजाने-संवारने के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं. रंग-बिरंगी लाइटों से जन्मस्थान जगमगा रहा है और भक्तों का उत्साह देखने लायक है. इस बार भगवान श्रीकृष्ण के 5252वें जन्मोत्सव पर माहौल बेहद अद्भुत और अलौकिक होने वाला है.

पंडित अजय तैलंग के अनुसार, जन्माष्टमी की पूजा तभी पूर्ण मानी जाती है जब भगवान को चार विशेष चीजों का भोग लगाया जाए. इनमें से एक भी चीज छूट जाए, तो व्रत और पूजा अधूरी मानी जाती है.

जन्माष्टमी के व्रत में इन 4 चीजों का भोग जरूरी
जन्माष्टमी के व्रत में भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए चार विशेष चीजों का भोग जरूरी माना जाता है. पंडित अजय तैलंग के अनुसार, इन वस्तुओं का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. इनमें सबसे पहले माखन मिश्री का स्थान आता है, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में माखन चोरी की याद दिलाता है और उनके बचपन से गहरा संबंध रखता है.

दूसरी चीज धनिया की पंजीरी है, जिसे व्रत में विशेष रूप से बनाया जाता है और यह पचने में हल्की होने के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी शुभ मानी जाती है. तीसरी वस्तु चावल की खीर है, जो पूजन में पवित्र और मंगलकारी मानी जाती है. चौथी और अंतिम वस्तु खीरा है, जिसे भगवान का अत्यंत प्रिय माना गया है, इसलिए इसका भोग विशेष महत्व रखता है.

खीरे से लड्डू गोपाल का जन्म कराने की विधि
जन्माष्टमी की रात करीब 7 बजे एक खीरा लिया जाता है. अगर खीरे में डंठल हो तो इसे शुभ माना जाता है, हालांकि साधारण खीरा भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस खीरे को फूलों से सजी हुई टोकरी या किसी सुंदर बर्तन में रखा जाता है और उस पर लड्डू गोपाल को लिटा दिया जाता है. इसके बाद उन्हें लाल कपड़े से ढककर आधी रात तक जन्म का इंतजार किया जाता है.

ठीक 12 बजे शंख, घंटी और ताली बजाते हुए “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयकारे लगाए जाते हैं और लड्डू गोपाल को खीरे से बाहर निकाला जाता है. इसके बाद खीरे के डंठल को सिक्के की मदद से घड़ी की दिशा में काटा जाता है. डंठल को गमले की मिट्टी में दबा दिया जाता है और सिक्का अपने पास रखा जाता है. अंत में खीरे को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है और लड्डू गोपाल का अभिषेक व श्रृंगार कर विशेष पूजा की जाती है.
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प्रशासन ने कसी कमर
जन्माष्टमी पर मथुरा में सुरक्षा, सजावट और भक्तों की सुविधा के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है. भगवान के जन्मस्थान को खूबसूरत लाइटों और सजावट से सजाया गया है, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और मनमोहक हो गया है.

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