जिन्हें चार शादियां करने की इजाजत, वे भी इन महीनों में नहीं पढ़ते निकाह…टूट पड़ेगी आफत या कारण कुछ और है?

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जिन्हें चार शादियां करने की इजाजत, वे भी इन महीनों में नहीं पढ़ते निकाह…टूट पड़ेगी आफत या कारण कुछ और है?


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Which month is not good for marriage in islam : इस्लाम में पूरे साल में किसी भी समय शादी करने की इजाजत है, लेकिन कुछ महीने में लोग शादी करने से बचते हैं. आइये जानते हैं कि इन महीनों में शहनाई क्यों नहीं बजती?

अलीगढ़. इस्लाम धर्म में विवाह को एक पवित्र और अहम (सुन्नत) माना गया है, जिसे पूरा करना नेक काम कहलाता है. इस्लाम मे पूरे साल में किसी भी समय शादी करने की इजाजत है, लेकिन कुछ महीने ऐसे माने जाते हैं, जिनमें शादियां नहीं की जाती हैं. यह परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक भावनाओं, ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक मान्यताओं पर आधारित है. ठीक हिंदुओं की तरह. हिंदू धर्म में भी कुछ महीनों को विवाह जैसे शुभ कार्यों के लिए ठीक नहीं माना जाता है. मुख्य रूप से सावन (श्रावण) और भाद्रपद (भादों) महीनों में विवाह करना वर्जित है. कुछ अन्य कारक जैसे गुरु और शुक्र का अस्त होना भी विवाह के लिए ठीक नहीं होता.

चांद दिखने से डूबने तक

अलीगढ़ के मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन बताते हैं कि मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना होता है. यह महीना हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला में शहादत की याद में गम और मातम के रूप में मनाया जाता है. शिया समुदाय में इस महीने को बहुत ही अदब और गमगीन अंदाज में गुजारा जाता है. इसी कारण से इस महीने में किसी भी प्रकार की खुशी या उत्सव, जैसे शादी-विवाह से परहेज किया जाता है. अधिकतर लोग मोहर्रम के महीने में शादियां करने से पहरेज करते हैं. मोहर्रम का चांद दिखने से लेकर चांद डूबने तक शादी विवाह नहीं करते.

रमजान में क्यों मनाही?

मौलाना इफराहीम हुसैन के मुताबिक, दूसरा महीना रमजान है. रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना होता है जिसमें मुसलमान रोजा रखते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और खुदा से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. यह महीना पूरी तरह इबादत, सब्र और आत्मिक शुद्धि के लिए समर्पित है. ऐसे में शादी जैसे सामाजिक आयोजन करने को अनुचित माना जाता है. यह ध्यान को इबादत से हटा सकता है. कुछ लोग सफर के महीने में भी शादी करने से बचते हैं. यह इस्लामी कैलेंडर का दूसरा महीना होता है और समाज में इसे “मुसीबतों का महीना” मानने की एक प्रचलित धारणा है. हालांकि इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है. फिर भी कुछ लोग परंपरा के अनुसार इस महीने शादी से परहेज करते हैं.

कभी भी जायज लेकिन…

मौलाना इफराहीम के अनुसार, हालांकि शरीअत (इस्लामी कानून) के अनुसार पूरे साल में कभी भी शादी करना जायज है. लेकिन इन महीनों में शादी न करना एक धार्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक परंपरा का हिस्सा बन चुका है, जिसे चार शादियां करने की प्रथा वाला मुस्लिम समुदाय भी पूरी श्रद्धा और आदर के साथ निभाता है.

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जिन्हें चार शादियां करने की इजाजत, वे भी इन महीनों में नहीं पढ़ते निकाह



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