न सागौन, न शीशम…गोंडा के इस किसान ने क्यों लगाई यूकेलिप्टस? आप भी करने लगोगे यही काम
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Eucalyptus Farming Benefits : यूपी के गोंडा का ये किसान पारंपरिक खेती के साथ यूकेलिप्टस (सफेदा) की बागवानी भी कर रहा है. कम देखभाल और लंबे समय में बेहतर मुनाफा इसकी खेती का सार है. लोकल 18 से गोंडा के किसान हरिओम मिश्रा बताते हैं कि यूकेलिप्टस के पौधे तेजी से बढ़ते हैं और 4 से 5 साल में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. हरिओम के अनुसार, खेत में पौधे लगने के शुरुआती वर्षों में नियमित देखभाल करने से उनकी वृद्धि अच्छी होती है. एक बार पौधे लग जाने के बाद देखभाल कम करनी पड़ती है.
गोंडा. यूकेलिप्टस की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. यूपी के गोंडा का एक युवा किसान पारंपरिक खेती के साथ यूकेलिप्टस (सफेदा) की बागवानी कर अच्छी आय प्राप्त कर रहा है. कम देखभाल और लंबे समय में बेहतर मुनाफे की संभावना के कारण अब कई किसान भी इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. लोकल 18 से गोंडा के किसान हरिओम मिश्रा बताते हैं कि यूकेलिप्टस के पौधे तेजी से बढ़ते हैं और कुछ वर्षों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इसकी लकड़ी का उपयोग फर्नीचर, प्लाईवुड, कागज उद्योग और अन्य कई कार्यों में किया जाता है, जिससे बाजार में इसकी मांग बनी रहती है.
हरिओम मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर तक की पढ़ाई की है. पढ़ाई पूरा होने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. तैयारी के साथ-साथ वह यूकेलिप्टस की बागवानी भी कर रहे हैं. हरिओम के अनुसार, खेत में पौधे लगने के शुरुआती वर्षों में नियमित देखभाल करने से उनकी वृद्धि अच्छी होती है. एक बार पौधे लग जाने के बाद उनकी देखभाल अपेक्षाकृत कम करनी पड़ती है.
कितने बीघा में लगाया
हरिओम मिश्रा बताते हैं कि वे इस समय लगभग पांच बीघा में यूकेलिप्टस की बागवानी कर रहे हैं. भविष्य में इसको और आगे बढ़ाना है. पौधा लगाने के 4 से 5 साल बाद काटने के लिए तैयार हो जाता है. हमारा लगभग 1 साल का यूकेलिप्टस हो गया है. 3 साल बाद लाखों रुपये इनकम की उम्मीद है. हरिओम का कहना है कि यूकेलिप्टस की बागवानी उन क्षेत्रों में लाभदायक हो सकती है, जहां मिट्टी और जलवायु इसके अनुकूल हो. हालांकि, किसानों को पौधे लगाने से पहले कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही बागवानी शुरू करनी चाहिए.
दूसरे किसान क्या कर रहे
गोंडा के इस युवा किसान की सफलता को देखकर आसपास के दूसरे किसान भी यूकेलिप्टस की खेती के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. किसान हरिओम का कहना है कि सही योजना और धैर्य के साथ की गई बागवानी भविष्य में अच्छी आय का साधन बन सकती है. यूकेलिप्टस की बागवानी आज किसानों के लिए एक वैकल्पिक आय का माध्यम बनती जा रही है. गोंडा का यह युवा किसान भी इसी बागवानी के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने में सफल हो रहा है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें