बच्चों को डराने से लेकर बॉलीवुड तक, आगरा के पागलखाने की अनसुनी कहानी

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बच्चों को डराने से लेकर बॉलीवुड तक, आगरा के पागलखाने की अनसुनी कहानी


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आगरा का पागलखाना, जिसे आज मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के नाम से जाना जाता है, देश के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है. ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित इस संस्थान ने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं. बदलते नाम, पुरानी मान्यताएं, उपचार के तरीके और इससे जुड़े अनगिनत किस्से इसे इतिहास और समाज दोनों की दृष्टि से बेहद खास बनाते हैं.

आगरा का पागलखाना, जिसे आज मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के नाम से जाना जाता है, अपनी स्थापना से लेकर अब तक कई रोचक किस्सों और ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है. ब्रिटिश काल में शुरू हुआ यह संस्थान आज मानसिक रोगियों के उपचार के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. पहले की तुलना में अब यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. इस संस्थान से जुड़ी कई कहानियां आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं. आज हम आपको ऐसे ही 8 दिलचस्प किस्सों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. सन 1857 की क्रांति के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि कई अंग्रेज अधिकारी मानसिक रूप से प्रभावित होने लगे थे. उस समय आगरा किले के प्रभारी लेफ्टिनेंट गवर्नर जॉन रसेल कोल्विन भी गहरे तनाव में चले गए थे और उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था. बाद में हैजा की चपेट में आने से उनकी मृत्यु हो गई और उन्हें आगरा किले में ही दफनाया गया. माना जाता है कि यहीं से आगरा में मानसिक रोगियों के लिए एक विशेष संस्थान स्थापित करने की आवश्यकता महसूस हुई, जिसने आगे चलकर आगरा के प्रसिद्ध पागलखाने की नींव रखी.

किस्से

आगरा का पागलखाना अपने बदलते नामों के लिए भी जाना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1859 में इसे आगरा ल्यूनेटिक एसाइलम के नाम से स्थापित किया गया था. इसके बाद वर्ष 1925 में इसका नाम बदलकर आगरा मानसिक अस्पताल कर दिया गया. फिर वर्ष 1994 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इसे आगरा मानसिक आरोग्यशाला के नाम से जाना जाने लगा. बाद में वर्ष 2001 में इसका नाम बदलकर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय कर दिया गया, और तभी से यह इसी नाम से पहचाना जाता है. यह संस्थान न केवल अपने लंबे इतिहास बल्कि समय-समय पर हुए बदलावों के कारण भी चर्चा में रहा है.

किस्से

आगरा में शुरुआती दौर में मानसिक रूप से बीमार लोगों को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. इसी कारण अंग्रेजों ने शुरुआत में एक पुरानी जेल का उपयोग किया, जहां ऐसे लोगों को बंद रखकर उनकी देखभाल की जाती थी. बाद में वर्ष 1859 में इस व्यवस्था को सिकंदरा क्षेत्र के बिलोचपुरा स्थित करीब 172 एकड़ के विशाल परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद यह संस्थान धीरे-धीरे विकसित हुआ और आम लोगों के बीच आगरा के पागलखाने के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

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किस्से

बताया जाता है कि वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद इस संस्थान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया. याचिका में दावा किया गया था कि यहां कुछ ऐसे मरीज भी रह रहे हैं, जो पूरी तरह स्वस्थ हो चुके थे, लेकिन विभिन्न कारणों से अब भी संस्थान में ही रह रहे थे. इस मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संस्थान की व्यवस्थाओं, मरीजों के पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए कई निर्देश दिए. इसके बाद मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के जीर्णोद्धार और मरीजों के बेहतर पुनर्वास की दिशा में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए.

किस्से

इतिहासकारों के अनुसार, अंग्रेजों के दौर में मानसिक रोगों के उपचार के आधुनिक तरीके उपलब्ध नहीं थे. उस समय मानसिक बीमारी को अक्सर अभिशाप या सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता था. बताया जाता है कि कई मरीजों को नियंत्रित रखने के लिए भारी लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा जाता था, ताकि वे किसी तरह की अव्यवस्था न फैलाएं. उन पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को उपचार की बजाय सामाजिक नियंत्रण या दंडात्मक व्यवस्था के रूप में देखा जाता था. समय के साथ चिकित्सा विज्ञान में हुए विकास ने इस सोच और व्यवस्था में बड़े बदलाव लाए, जिसके बाद मानसिक रोगियों के उपचार और पुनर्वास पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा.

किस्से

आगरा का Mental Health Institute and Hospital Agra वर्तमान में अपनी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और उपचार पद्धतियों के लिए जाना जाता है. यहां मानसिक रोगियों का आधुनिक तकनीकों, थेरेपी और दवाओं की मदद से इलाज किया जाता है और स्वस्थ होने के बाद उन्हें पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत घर भेजा जाता है. कहा जा सकता है कि यह संस्थान अब पहले की जंजीरों और कैद वाली छवि से काफी आगे निकल चुका है. करीब 172 एकड़ में फैला यह विशाल संस्थान न केवल उत्तर भारत के मरीजों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े शोध और चिकित्सकों के प्रशिक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. समय के साथ यहां उपचार और देखभाल की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव हुए हैं, जिससे यह देश के प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में गिना जाने लगा है.

किस्से

आगरा का पागलखाना आम बोलचाल की भाषा में इतना प्रसिद्ध रहा है कि इसका नाम लगभग हर किसी ने सुना है. वर्षों से यह लोगों की बातचीत और लोककथाओं का हिस्सा बना हुआ है. कई परिवारों में बच्चों को समझाने या मजाकिया अंदाज में चेतावनी देने के लिए अक्सर कहा जाता था, “सुधर जाओ, वरना आगरा के पागलखाने भेज देंगे.” हालांकि, यह एक सामाजिक कहावत के रूप में प्रचलित रही है. इसके अलावा, आगरा के इस संस्थान का उल्लेख कई फिल्मों, साहित्यिक रचनाओं और लोकप्रिय संस्कृति में भी देखने को मिलता है. बॉलीवुड फिल्मों में मानसिक अस्पतालों के संदर्भ में आगरा का नाम कई बार प्रतीकात्मक रूप से इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी पहचान देशभर में और अधिक व्यापक हुई. आज यह संस्थान अपने ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी जाना जाता है.

किस्से

इतिहासकारों के अनुसार, 1857 की क्रांति के दौरान बड़ी संख्या में ब्रिटिश अधिकारियों और सैनिकों पर गहरा मानसिक प्रभाव पड़ा था. तनाव, सदमे और संघर्ष की परिस्थितियों से जुड़े मामलों की रिपोर्ट ब्रिटिश प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए विशेष संस्थानों की आवश्यकता महसूस की गई. इसी क्रम में वर्ष 1859 में आगरा में एक मानसिक चिकित्सालय की स्थापना की गई, जिसे बाद में आगरा के पागलखाने के नाम से पहचान मिली. समय के साथ यह संस्थान विकसित होकर देश के प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल हो गया.

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