श्री हनुमान चालीसा संपूर्ण पाठ- श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि.. इस दोहे का असली अर्थ क्‍या है, जप करने से क्‍या होगा फायदा

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श्री हनुमान चालीसा संपूर्ण पाठ- श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि.. इस दोहे का असली अर्थ क्‍या है, जप करने से क्‍या होगा फायदा


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Hanuman Chalisa : हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करने से जीवन के सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं यह दोहा व्यक्ति के जीवन में कल्याणकारी मंत्र माना जाता है. गोस्वामी तुलसीदास के माध्यम से यह दोहा हमारे जीवन के लिए ब…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • हनुमान चालीसा में कई चमत्कारिक दोहे हैं
  • राम कचहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास ने बताई चालीसा की अहम बातें
  • हनुमान चालीसा हनुमानजी को स्वयं बहुत प्रिय है

अयोध्या: हनुमानजी की कृपा पाने के लिए या पवनपुत्र को प्रसन्न करने के लिए तमाम भक्त हनुमान चालीसा का पाठ तो करते ही हैं. लेकिन, क्या आपको हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) की एक-एक चौपाई का सटीक अर्थ पता है? गोस्वामी तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा का बहुत बड़ा महत्व है. इसमें कई चमत्कारिक चौपाइयां हैं, जिनका अर्थ समझकर पढ़ने या जाप करने मात्र से हर मनोरथ सिंद्ध हो जाता है. ऐसा माना जाता है कि हनुमान चालीसा हनुमानजी को स्वयं बहुत प्रिय है. इसके श्रवण से वह बेहद प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा करते हैं.

संतों का ऐसा मानना है कि बिना अर्थ जाने अगर हम हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, तो उसका पूर्ण फल हमें नहीं प्राप्त होगा. पूर्ण फल नहीं मिलने से मनोरथ सिद्धि में बाधा आएगी. कलयुग में हनुमानजी को जागृत देव माना गया है. बिना उनकी कृपा कार्य सिद्धि मुश्किल है. ऐसी स्थिति में अगर आप जीवन में हनुमानजी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना आरंभ कर दें. हनुमान चालीसा में ऐसे कई चमत्कारिक दोहे हैं, जिसका अर्थ समझते हुए पाठ करने से सभी तरह के लक्ष्य की प्राप्ति संभव हो जाती है.

शुरुआत पहले दोहे से…हनुमान चालीसा की शुरुआत ‘श्री गुरु चरण सरोज रज, निजमन मुकुर सुधारि, बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि’ से होती है. यह दोहा तो सभी को याद है, लेकिन इसका सटीक अर्थ किसी-किसी को ही पता होता है. अयोध्या स्थित राम कचहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास बताते हैं..

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि… इसका अर्थ है कि मैं अपने गुरु के कमल के समान चरण कमलों की धूल को अपने मस्तक पर धारण करता हूं, ताकि यह गुरु चरणों की रज के प्रताप से मेरा मन शुद्ध हो सके. मेरे मन के विकार मिट सकें. मेरा मन पवित्र हो सके. मेरा मन दर्पण की तरफ साफ हो सके. (यहां बता दें कि सनातन धर्म में गुरु के चरणों की रज का बहुत बड़ा महत्व है. ऐसा माना जाता है कि गुरु या संत चरणों की रज से मात्र को धारण से जीवन के तमाम विघ्न मिट जाते हैं.)

बरनऊ रघुवर बिमल जस: जो दायक फल चारि…इसका अर्थ है कि मैं श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करना चाहता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ (धन), काम (कामना) और मोक्ष (मुक्ति) का देने वाला है. यानी, भक्त की प्रार्थना है कि श्री गुरु के चरण रज की कृपा से मेरा निर्मल हो, ताकि मैं रघुवर के निर्मल यश का बखान कर सकूं. उस यश का बखान कर सकूं, जो चार फलों का देने वाला है. (बता दें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही जीवन का आधार कहे गए हैं. इनकी प्राप्ति से मनुष्य योनि में जन्म सफल माना गया है.)

मिलता है विशेष लाभ 

वहीं, राम कचहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास ने बताया कि हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करने से जीवन के सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं. यह दोहा व्यक्ति के जीवन में कल्याणकारी मंत्र माना जाता है. गोस्वामी तुलसीदास के माध्यम से यह दोहा हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और हमारे जीवन में सभी प्रकार मंगल करने वाला होता है. इस दोहे का जाप करने से जीवन में प्रभु राम के चरणों का प्रेम मिलता है और जो समस्त फलों को देते हैं.

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श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि.. इस दोहे का असली अर्थ क्‍या है?

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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