ताजमहल के गुंबद के पास बने मस्जिद का अद्भुत है वास्तुकला, इस्लाम धर्म मे इसका है खास महत्व
Last Updated:
ताजमहल की मुख्य गुम्बद के पश्चिमी दिशा में लाल बलुआ पत्थरों से खूबसूरत मस्जिद बनी हुई है. उन्होंने कहा कि यह मस्जिद इस्लामिक धार्मिक महत्व का अनूठा उदाहरण है. शुक्रवार के दिन यहाँ इस्लाम धर्म के लोग बड़ी मात्रा में नमाज अदा करने आते है. उन्होंने कहा कि इस दिन ताजमहल पुरे दिन आम पर्यटकों के लिए बंद रहता है. केवल नमाजी ही यहाँ दोपहर के वक़्त नमाज अदा करने आ सकते है.
आगरा: सफेद संगमरमर से बना ताजमहल, यह आकर्षित ईमारत कई इतिहास से जुड़े किस्सों के लिए मशहूर है. ताजमहल की मुख्य गुम्बद की पश्चिमी में एक विशाल मस्जिद बनी हुई है, जिसका विशेष महत्व बताया जाता है. आगरा कॉलेज के प्रोफेसर ने बताया कि ताजमहल के पास बनी मस्जिद का धार्मिक और वास्तुशिल्प दोनों दृष्टियों से बहुत अधिक महत्व है.
उन्होंने कहा कि इस्लामी परंपरा के अनुसार किसी भी मकबरे या कब्र के पास एक मस्जिद का होना जरूरी होता है. उन्होंने बताया कि ताजमहल के पास बनी इस मस्जिद परिसर में आने वाले लोगों को नमाज पढ़ने की सुविधा मिलती है और इसे एक पवित्र स्थान भी बनाती है. उन्होंने कहा कि शुक्रवार की नमाज ताजमहल में पढ़ी जाती है इस दिन आम पर्यटकों के लिए ताजमहल बंद रहता है.
इस्लामिक धार्मिक महत्व को बढ़ाती है यह मस्जिद
आगरा कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर राजपाल सिंह ने बताया कि ताजमहल की मुख्य गुम्बद के पश्चिमी दिशा में लाल बलुआ पत्थरों से खूबसूरत मस्जिद बनी हुई है. उन्होंने कहा कि यह मस्जिद इस्लामिक धार्मिक महत्व का अनूठा उदाहरण है. शुक्रवार के दिन यहाँ इस्लाम धर्म के लोग बड़ी मात्रा में नमाज अदा करने आते है. उन्होंने कहा कि इस दिन ताजमहल पुरे दिन आम पर्यटकों के लिए बंद रहता है. केवल नमाजी ही यहाँ दोपहर के वक़्त नमाज अदा करने आ सकते है. उन्होंने कहा कि यह इस्लाम धर्म में किसी भी मकबरे या कब्र के पास मस्जिद का होना धार्मिक आस्था के अनुसार अच्छा माना जाता है और यही कारण है कि मुग़लकाल में ताजमहल निर्माण के साथ इस मस्जिद का भी निर्माण किया गया था.
वास्तुकला का है बेहतरीन उदाहरण
प्रोफेसर राजपाल सिंह ने बताया कि ताजमहल के पश्चिमी दिशा की ओर बनी लाल पत्थरों कि मस्जिद अद्धभुत वास्तुकला की झलक दिखाती है. उन्होंने कहा कि मस्जिद की दीवारों पर कुरान की आयतें और अल्लाह के नाम बड़े ही खूबसूरती से उकेरे गए हैं. जो इसको और भी अधिक आकर्षित बनाते है. उन्होंने कहा कि मस्जिद के फर्श को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह नमाज़ की चटाई जिसे मुसल्ला कहा जाता है वह आसानी से दिखाई दे सके. प्रोफेसर ने बताया कि मस्जिद में कुल 569 काली धारियां बनी हैं जो दुआओं को करने वालों के लिए स्थान दर्शाती हैं.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें