ये हैं बरेली शहर के 3 ‘जल पुरुष’, जिनकी दानवीरता ने बदल दी कई गांवों की सूरत

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ये हैं बरेली शहर के 3 ‘जल पुरुष’, जिनकी दानवीरता ने बदल दी कई गांवों की सूरत


बरेली: उत्तर प्रदेश का बरेली शहर अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ समाज सेवा की अनोखी मिसालों के लिए भी जाना जाता है. यहां तीन ऐसे जल पुरुष हुए हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों से न सिर्फ लोगों की जिंदगी आसान बनाई, बल्कि जल संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.

बरेली के वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेश शर्मा बताते हैं कि पहले के समय में जब लोग बरेली से दिल्ली की ओर जाते थे, तब रास्ते में नदी पार करने के लिए कोई पक्का पुल मौजूद नहीं था. उस समय केवल एक टूटा-फूटा और कच्चा रास्ता था, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती थी. बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी.

लोगों के जीवन में पुल लाया बदलाव
जब पानी का बहाव तेज होने के कारण लोगों का आना-जाना लगभग ठप पड़ जाता था. ऐसे समय में किला कोठी वालों ने आगे बढ़कर एक पुल के निर्माण का कार्य कराया. यह पुल भले ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त न रहा हो, लेकिन उस समय के लिए यह लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया और आवागमन को सुरक्षित व सुगम बनाया.

सड़क जोड़ने के लिए जमीन कर दी दान
इसी तरह मीरगंज क्षेत्र का भी एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आता है. यहां राम सिंह नामक व्यक्ति ने अपने गांव को मुख्य पुल से जोड़ने के लिए अपनी कीमती जमीन दान कर दी. उस समय गांव का संपर्क सीधे रोड से नहीं हो पा रहा था, जिससे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाएं गांव तक नहीं पहुंच पा रही थीं. राम सिंह के इस त्याग और दूरदर्शिता ने न केवल सड़क निर्माण का रास्ता खोला, बल्कि पूरे गांव के विकास की नींव रखी. आज गांव के लोग आसानी से शहर से जुड़ पाते हैं और उनका जीवन पहले से कहीं अधिक बेहतर हुआ है.

स्थानीय लोग निभा रहे भागीदारी
इसके अलावा राजीव नाम के एक समाजसेवी जिन्हें सर्वोदय अन्न के नाम से जाना जाता है, बरेली के प्रमुख जल पुरुषों में गिने जाते हैं. उनका जीवन पूरी तरह समाज सेवा को समर्पित है. वे गांव-गांव जाकर तालाबों के निर्माण और उनके पुनर्जीवन का कार्य करते हैं. उनका उद्देश्य है कि बारिश का पानी व्यर्थ न बह जाए, बल्कि उसे संग्रहित कर भविष्य में उपयोग किया जा सके.

राजीव का मानना है कि जल ही जीवन है और यदि आज जल का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है. उनके प्रयासों से कई गांवों में सूखे पड़े तालाब फिर से जीवित हो चुके हैं. इससे न केवल भूजल स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि खेती और पशुपालन को भी बड़ा लाभ मिला है. स्थानीय लोग भी अब जल संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं और इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं.

समस्याओं को दूर करना उद्देश्य
इन जल पुरुषों की खास बात यह है कि इन्होंने बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए कार्य किया. न तो इन्होंने प्रसिद्धि की चाह रखी और न ही किसी लाभ की अपेक्षा की. इनका एकमात्र उद्देश्य था लोगों की समस्याओं को दूर करना और समाज को बेहतर बनाना. आज के समय में जब शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे में बरेली के ये जल पुरुष एक प्रेरणा बनकर सामने आते हैं.

इनकी कहानियां हमें यह सिखाती हैं कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं. जरूरत है कि समाज इनसे प्रेरणा ले और जल संरक्षण और सामाजिक विकास के कार्यों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य मिल सके.



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