इस यूनिवर्सिटी में लगाया गया वॉटर एप्पल, खूबसूरती और मिठास के लोग हैं दीवाने

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इस यूनिवर्सिटी में लगाया गया वॉटर एप्पल, खूबसूरती और मिठास के लोग हैं दीवाने


सहारनपुर: सेब खाना तो सभी को पसंद होता है, लेकिन क्या आपने कभी “रोज वॉटर एप्पल” (Rose Water Apple) का नाम सुना है? नाम सुनकर अगर आप सोच में पड़ गए हैं, तो बता दें कि यह सेब जितना नाम में खास है, उतना ही स्वाद में मीठा और दिखने में बेहद खूबसूरत भी है. इसे देखकर लोग एक पल को सोच में पड़ जाते हैं कि ये फल असल में है क्या.

रोज वॉटर एप्पल, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Syzygium Samarangense कहा जाता है, दक्षिण-पूर्व एशिया का उष्णकटिबंधीय फल है। इसे रोज एप्पल, मालाबार प्लम या वॉटर एप्पल जैसे नामों से भी जाना जाता है. इसकी त्वचा गुलाबी या गुलाब की पंखुड़ियों जैसी होती है और स्वाद में यह हल्का-मीठा, रसदार होता है. अब तक यह फल मुख्य रूप से हिमालय क्षेत्र या विदेशों में ही उगाया जाता था, लेकिन अब रुड़की की कोएर यूनिवर्सिटी में इसे रिसर्च के लिए उगाया जा रहा है.

रिसर्च के लिए लगाया गया, अब किसानों के लिए बन रहा मौका
कोएर यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने इस खास वैरायटी को अपने 50 बीघा ऑर्गेनिक फार्म में उगाया है. यूनिवर्सिटी में खेती से जुड़े 50 से ज्यादा विदेशी पौधों पर रिसर्च की जा रही है. संदीप चौधरी, जो इस परियोजना से जुड़े हैं, उन्होंने लोकल18 से बातचीत में बताया कि विश्वविद्यालय के चेयरमैन की सोच है कि यहां कुछ नया और उपयोगी किया जाए, जिससे छात्र भी सीखें और किसानों को भी फायदा मिले.

इस रिसर्च सेंटर में स्टूडेंट्स को बाहर जाकर रिसर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि सभी विदेशी और दुर्लभ किस्मों के पौधे यहीं मौजूद हैं. इन्हीं में से एक है “रोज वॉटर एप्पल” का पौधा, जिसकी हर साल ज़बरदस्त फ्रूटिंग होती है.

सेहत के लिए भी फायदेमंद
“रोज वॉटर एप्पल” केवल स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसे नियमित खाने से बालों की गुणवत्ता और त्वचा की चमक बढ़ती है. यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है.

अब किसानों के लिए भी तैयार हो रही पौध
कोएर यूनिवर्सिटी में अब इस फल के पौधों को तैयार किया जा रहा है ताकि आसपास के किसान इसे अपने खेतों में लगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकें. चूंकि यह वैरायटी भारत में अब तक बहुत सीमित है, इसलिए इसकी मांग भी अधिक है. यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि रोज वॉटर एप्पल को भारत में एक नई पहचान भी देगा.



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