क्रांति की लौ में जलकर गुमनाम हो गए ये 26 चेहरे…अब शहीद वॉल पर मिली अमर पहचान!

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क्रांति की लौ में जलकर गुमनाम हो गए ये 26 चेहरे…अब शहीद वॉल पर मिली अमर पहचान!


प्रयागराज: देश को आज़ादी दिलाने की लड़ाई में कई ऐसे नाम सामने आए जिन्हें इतिहास में खास जगह मिली, लेकिन कुछ अनसुने और गुमनाम हीरो (अनसंग हीरो) ऐसे भी थे, जिनका योगदान उतना ही बड़ा था मगर वे इतिहास के पन्नों में दबकर रह गए. ये ना तो किसी राजनीतिक परिवार से थे, ना ही किसी बड़े व्यापारी वर्ग से. ये थे आम लोग किसान, सफाई कर्मचारी और मजदूर, जिन्होंने चुपचाप आजादी की नींव रखने में मदद की. अब प्रयागराज में देश की पहली ‘शहीद वॉल’ बनाकर इन नायकों को सम्मानित किया जा रहा है.

‘भारत भाग्य विधाता संस्था’ ने इन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की पहचान कर उन्हें सम्मान देने का फैसला किया. संस्था ने प्रयागराज के सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित रोडवेज बस स्टैंड के सामने ‘शहीद वॉल’ का निर्माण कराया, जिसका सौंदर्यीकरण स्मार्ट सिटी मिशन के तहत किया गया.

शाम के समय जब इस शहीद वॉल पर रंग-बिरंगी लाइटिंग होती है, तो यह नजारा बेहद भावुक कर देने वाला होता है. यहां पर 26 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम और चित्र उनके योगदान के साथ अंकित किए गए हैं.

इन अनसंग हीरोज को ढूंढना आसान नहीं था
संस्था के संस्थापक वीरेंद्र पाठक ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि प्रयागराज के इन 26 गुमनाम क्रांतिकारियों को ढूंढने में कई सालों का समय और मेहनत लगी. इन नामों में शहीद द्वारका प्रसाद, रमेश मालवीय, लाल पदवीधर, शहीद ननका, राम सिंह, रघुनाथ सिंह, विश्वनाथ सिंह, अकीलउद्दीन, खाई मासिन अली, शिवांश और शिवरतन जैसे कई ऐसे नाम शामिल हैं जिनका ज़िक्र इतिहास की मुख्यधारा में नहीं होता.

देश की पहली ‘शहीद वॉल’ की खासियत
वीरेंद्र पाठक बताते हैं कि 12 जनवरी 2015 को प्रयागराज की इस ‘शहीद वॉल’ की स्थापना की गई थी. यह देश की पहली ऐसी वॉल है, जहां गुमनाम शहीदों की तस्वीरों के साथ उनकी गौरवगाथा को भी लिखा गया है.

यह वॉल ऐसे परिवारों से आने वाले शहीदों को समर्पित है जो समाज के आम वर्ग से थे जैसे सफाई कर्मचारी, किसान और मज़दूर. इसकी स्थापना तत्कालीन राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के हाथों की गई थी. साल 2022 में स्मार्ट सिटी योजना के तहत इसका फिर से सौंदर्यीकरण भी किया गया.

महाकुंभ में भी हुई सराहना
महाकुंभ के दौरान जब करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे, तो इस ‘शहीद वॉल’ को देखकर हर कोई भावुक हो गया. विदेशी पर्यटक भी इस दीवार को देखकर हैरान रह गए कि भारत में गुमनाम क्रांतिकारियों को कितना सम्मान दिया जाता है.



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