जल्दबाजी न करें, अभी नहीं बाद में बेचें, सरसों स्टोर कर कमाएं ज्यादा मुनाफा

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जल्दबाजी न करें, अभी नहीं बाद में बेचें, सरसों स्टोर कर कमाएं ज्यादा मुनाफा


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सरसों को वैज्ञानिक ढंग से स्टोर कर किसान कमा सकते हैं ज्यादा मुनाफा, जाने कैसे

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर समेत कई क्षेत्रों में सरसों की कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन बाजार में कम दाम मिलने से किसान फसल को स्टोर करने की तैयारी कर रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करने पर किसान बाद में ज्यादा कीमत पर सरसों बेचकर लाभ कमा सकते हैं. नमी 14% से कम रखना, नीम की पत्तियों या पारा टिकड़ी का उपयोग करना और समय-समय पर धूप दिखाना जरूरी बताया गया है. सही तरीके से स्टोर की गई सरसों जनवरी में बेहतर भाव दिला सकती है.

शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर सहित कई क्षेत्रों में सरसों की कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है. वर्तमान समय में बाजार भाव उम्मीद से कम होने के कारण किसान अपनी उपज को तुरंत बेचने के बजाय स्टोर करने का मन बना रहे हैं. जोकि किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है. कृषि एक्सपर्ट का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से सरसों का स्टोर कर किसान बाद में फसल बेचकर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. स्टोर करना न केवल उपज को सुरक्षित रखता है, बल्कि ऑफ-सीजन में जब मांग बढ़ती है, तब किसानों को उपज का ज्यादा भाव मिलता है. कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि एक्सपर्ट डॉ. विमल कुमार सिंह का कहना है कि सरसों को स्टोर करने के लिए नमी का विशेष ध्यान रखें. स्टोर करते समय सरसों के दानों में नमी की मात्रा 14% से अधिक नहीं होनी चाहिए. अगर नमी अधिक होगी, तो फंगस लगने का खतरा रहता है जिससे पूरी फसल खराब हो सकती है. किसानों को चाहिए कि वो नीम की सूखी पत्तियों या पारा टिकड़ी जैसी आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग करें. ताकि कीड़ों से बचाव हो सके, लंबे समय तक स्टोर करने पर बीच में एक बार धूप दिखाना भी जरूरी है.

वैज्ञानिक भंडारण की तकनीक
सरसों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए नमी का स्तर नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है. कटाई के बाद उपज को अच्छी तरह सुखाकर ही बोरियों या साइलो में भरना चाहिए. स्टोर करने के लिए जूट की नई बोरियों का उपयोग करें. स्टोर करने वाली जगह पूरी तरह हवादार और नमी मुक्त होना चाहिए. जमीन पर बोरियां सीधे रखने के बजाय लकड़ी के तख्तों का इस्तेमाल करें ताकि नीचे से नमी उपज को प्रभावित न कर सके.

कीट और फफूंद से बचाव
स्टोर करने के दौरान कीटों और फफूंद का खतरा सबसे अधिक होता है. नीम की पत्तियों को सुखाकर दानों के बीच रखने से प्राकृतिक रूप से सुरक्षा मिलती है. इसके अलावा बाजार में उपलब्ध पारा टिकड़ी की दो गोलियां प्रति क्विंटल के हिसाब से इस्तेमाल करें. ये विधियां उपज की गुणवत्ता को बनाए रखती हैं और उसे बाजार के मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखती हैं. लेकिन समय-समय पर स्टॉक की जांच करते रहना चाहिए.

धूप और हवा का प्रबंधन
अगर किसान अपनी सरसों को आठ से नौ महीने यानी दिसंबर-जनवरी तक स्टोर करना चाहते हैं, तो उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी. लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से अनाज के अंदरूनी हिस्से में फंगस पनप सकती है, इसलिए इस अवधि के दौरान कम से कम एक बार पूरी फसल को बाहर निकालकर तेज धूप में सुखाना चाहिए. इससे दानों की चमक बनी रहती है और किसी भी प्रकार की दुर्गंध या नमी पूरी तरह समाप्त हो जाती है.

भविष्य का बाजार और आर्थिक लाभ
सरसों को तुरंत बेचने के बजाय कुछ महीनों बाद बाजार में लाने से किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ होता है. जनवरी के आसपास सरसों की मांग काफी बढ़ जाती है और उस समय मिलने वाले दाम वर्तमान दरों से कहीं अधिक होते हैं. ऐसे में किसान अगर सरसों को सही तरीके से स्टोर करने तो ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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