ददुआ की पुण्यतिथि पर भंडारा, 17 साल तक चुप्पी के बाद अब श्रद्धांजलि क्यों? क्या है इसके पीछे की वजह

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ददुआ की पुण्यतिथि पर भंडारा, 17 साल तक चुप्पी के बाद अब श्रद्धांजलि क्यों? क्या है इसके पीछे की वजह


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Chitrakoot News : चित्रकूट जनपद के पाठा क्षेत्र में कभी आतंक का पर्याय रहे दुर्दांत डकैत शिवकुमार उर्फ ददुआ की पुण्यतिथि पर भंडारे का आयोजन किया जा रहा है. कई गांवों को उजाड़ देने वाले इस खूंखार डकैत की पूजा की…और पढ़ें

चित्रकूट में कभी आतंक का पर्याय रहा दुर्दांत डकैत शिवकुमार उर्फ ददुआ की पुण्यतिथि पर भंडारे का आयोजन..
चित्रकूट. चित्रकूट जनपद के पाठा क्षेत्र में कभी आतंक का पर्याय रहा दुर्दांत डकैत शिवकुमार उर्फ ददुआ एक बार फिर चर्चा में है. इस बार भंडारे और पुण्यतिथि के आयोजन को लेकर चर्चा में है.पाठा में उसकी दहशत से दिन में भी दरवाज़े बंद रहते थे. ददुआ का नाम सुनते ही बुंदेलखंड की धड़कनें तेज़ हो जाती थीं. जंगल में ‘राजा’ की तरह राज करने वाला यह डकैत हत्या, अपहरण, फिरौती, और आगजनी जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त था. कई गांवों को उजाड़ देने वाले इस खूंखार डकैत की पुण्यतिथि पर आज उसकी पूजा की जा रही है. लोग सर झुकाकर नमन कर रहे हैं? ऐसे में डकैत के पुण्यतिथि मनाना न सिर्फ कानून की खिल्ली उड़ाना है, बल्कि पीड़ितों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.

ग्राम पंचायत ऐलहा बढैया गांव के दतिया आश्रम में इस कुख्यात डकैत की पुण्यतिथि पर बड़े स्तर पर भंडारा आयोजित किया गया है. हजारों की तादाद में लोगों ने शिरकत की. समाजवादी पार्टी के जनप्रतिनिधि और नेताओं के साथ साथ पूर्व डकैत और ग्रामीण शामिल हुए. पुण्यतिथि कार्यक्रम में पहुंचकर डकैत ददुआ को श्रद्धांजलि देते किसी ने डकैत ददुआ को देवता बताया है तो किसी ने गरीबों का मसीहा बताया. डकैत ददुआ के बेटे पूर्व विधायक वीर सिंह ने अपने पिता की तुलना रॉबिड हुड से कर दी. हद तो तब हो गई जब वर्तमान बांदा चित्रकूट के सांसद पति व पूर्व मंत्री शिवशंकर सिंह पटेल ने डकैत ददुआ को देवता तक बना डाला है.

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क्या राजनीति फिर से डकैतों के सहारे?

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ददुआ की पुण्यतिथि महज़ एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक राजनीतिक गेम प्लान का हिस्सा है. बीते चुनाव में सपा के टिकट पर लड़ रहे ददुआ के बेटे को वीर सिंह पटेल को महज़ 1000 वोटों से हार मिली थी. जानकारों का मानना है कि ददुआ की ‘लोकप्रियता’ को कैश कराने की कोशिश फिर से हो रही है. क्या यह आयोजन भावनात्मक कार्ड खेलकर जनता की सहानुभूति बटोरने की साजिश है?

राजनीति ने फिर से ज़िंदा किया ‘डकैत ददुआ’ को?

2007 में एसटीएफ ने जब पाठा के जंगलों में ददुआ को मार गिराया था, तो पूरे बुंदेलखंड ने राहत की सांस ली थी. लगा कि डकैतों का युग समाप्त हो गया लेकिन अब 17 साल बाद अचानक से हर साल उसकी पुण्यतिथि मनाई जाने लगी है. सवाल यह है कि जिस कुख्यात अपराधी की बरसी कभी नहीं मनी, अब अचानक उसका ‘संत’ जैसा महिमामंडन क्यों? क्या यह सब सियासी खेल है?

17 साल तक चुप्पी, अब क्यों श्रद्धांजलि?

2007 से लेकर 2022 तक ददुआ का नाम सिर्फ इतिहास और पुलिस फाइलों में ही रहा. कभी कोई भंडारा, कभी कोई श्रद्धांजलि सभा नहीं हुई लेकिन बीते दो वर्षों से दतिया आश्रम में बड़े स्तर पर पुण्यतिथि और भंडारे का आयोजन किया जा रहा है. इसमें न सिर्फ ददुआ को श्रद्धा के फूल चढ़ाए जा रहे हैं, बल्कि राजनीतिक चेहरों की चुपचाप मौजूदगी भी देखी गई है. क्या यह महज इत्तेफाक है, या आने वाले चुनावों की तैयारी है.

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Chaturesh Tiwari

An accomplished digital content creator and Planner. Creating enhanced news content for online and social media. Having more than 10 years experience in the field of Journalism. Done Master of Journalism from M…और पढ़ें

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