पीलीभीत के बाद मुरादाबाद में सपा दफ्तर पर लटकी तलवार, क्या चलेगा बुलडोजर?

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पीलीभीत के बाद मुरादाबाद में सपा दफ्तर पर लटकी तलवार, क्या चलेगा बुलडोजर?


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Moradabad News: समजवादी पार्टी के पीलीभीत दफ्तर पर कार्रवाई के बाद अब मुरादाबाद में भी ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां मिलक क्षेत्र में स्थित समाजवादी पार्टी के दफ्तर को भी 250 रुपए मासिक किराए पर आवंटित किया ग…और पढ़ें

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव.

हाइलाइट्स

  • सपा दफ्तर का पीलीभीत मॉडल अब मुरादाबाद से भी सामने आया है
  • 31 साल पहले बेशकीमती जमीन को महज 250 रुपए मासिक किराये पर दिया गया
  • अब नगर निगम इस सपा दफतर भी कार्रवाई कर सकता है
मुरादाबाद. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सिविल लाइंस क्षेत्र के चक्कर की मिलक क्षेत्र में स्थित समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं. पीलीभीत में सस्ते किराए पर सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब मुरादाबाद में भी इसी तरह की अनियमितता की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि 31 साल पहले मुलायम सरकार में महज 250 रुपये मासिक किराए पर बेशकीमती जमीन सत्ता के बल पर आवंटित की गई.

गौरतलब है कि पीलीभीत में सपा ने 115 रुपये मासिक किराए पर नगर पालिका की संपत्ति पर कब्जा किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग का मामला करार दिया था. इसी तर्ज पर मुरादाबाद में भी सपा के कार्यालय के लिए 250 रुपये मासिक किराए पर जमीन आवंटित करने का मामला सामने आया है. कहा जा रहा है कि यह भी पीलीभीत की तरह सत्ता के दुरुपयोग का एक उदाहरण हो सकता है. इस जमीन की बाजार मूल्य लाखों रुपये में आंका जा रहा है.

तीन दशकों से संचालित है सपा दफ्तर

मुरादाबाद का यह सपा कार्यालय पिछले तीन दशकों से संचालित है. जानकारी के मुताबिक 1994 में सपा सत्ता में रहते हुए इस जमीन का आवंटन नियमों के खिलाफ किया गया था. नगर निगम ने हाल ही में इस संपत्ति का निरीक्षण किया है और कब्जा हटाने की तैयारी शुरू कर दी है. नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने जिला अधिकारी को अवैध कब्जे को लेकर एक रिपोर्ट भी भेजी है.

सपा का रुख

सपा नेताओं ने अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है. पीलीभीत मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद पार्टी बैकफुट पर दिख रही है. स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह एक पुराना आवंटन है और इसमें कोई अनियमितता नहीं है, लेकिन दस्तावेजों की जांच के अभाव में उनका दावा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

Principal Correspondent, Lucknow

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