फर्जी नाम, नकली रसीद और ₹300000 का गांजा, ‘सिल्क साड़ी’ के डिब्बा में नशा
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Silk Saree drug racket: वाराणसी एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की संयुक्त टीम ने रोहनिया थाना क्षेत्र के परमानंदपुर में स्थित टीसीआई एक्सप्रेस कूरियर कंपनी के गोदाम में छापेमारी कर कूरियर के जरिए चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय गांजा तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है. इस दौरान ‘सिल्क साड़ी’ लिखे पैकेटों में छिपाकर रखा गया 123 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है.
साड़ी के डिब्बे में मिला गांजा का भंडार.
उत्तर प्रदेश में नशे के सौदागरों और ड्रग माफियाओं का भंडाफोड़ हुआ है. रविवार को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की वाराणसी यूनिट की संयुक्त टीम ने कूरियर सर्विस के माध्यम से चल रहे एक हाई-प्रोफाइल अंतरराज्यीय गांजा तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है. तस्करों ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए तस्करी का ऐसा अनोखा और शातिर तरीका अपनाया, जिसे जानकर अधिकारी भी दंग रह गए. ये तस्कर कूरियर कंपनी के जरिए असम से सिल्क साड़ियों के नाम पर फर्जी रसीद कटवाकर उत्तर प्रदेश में भारी मात्रा में गांजे की खेप मंगवा रहे थे.
‘सिल्क साड़ी’ के डिब्बों से निकला नशा
एसटीएफ की वाराणसी यूनिट को जानकारी मिली थी कि रोहनिया थाना क्षेत्र के परमानंदपुर में स्थित टीसीआई एक्सप्रेस कूरियर सर्विस के गोदाम में अवैध मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप उतारी गई है. सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ और नार्कोटिक्स विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने गोदाम पर अचानक छापेमारी कर दी. कूरियर गोदाम की सघन तलाशी के दौरान अधिकारियों को कई ऐसे पार्सल और पैकेट्स मिले जिन पर बकायदा ‘सिल्क साड़ी’ लिखा हुआ था. जब संदेह के आधार पर इन सिल्क साड़ी लिखे पैकेटों को खोला गया, तो अंदर साड़ियों के बजाय गांजे के पैकेट छिपाकर रखे गए थे. इस छापेमारी में कुल 123 किलो गांजा बरामद किया गया है, जिसकी बाजार में कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी जा रही है.
आजमगढ़ से तस्कर गिरफ्तार
असम से जुड़े हैं नेटवर्क के तार
कूरियर गोदाम से अवैध दान पात्र से चोरी के कथित आरोप जैसी सतर्कता बरतते हुए पुलिस ने घेराबंदी की और मौके से कूरियर की डिलीवरी प्राप्त करने पहुंचे मुख्य तस्कर को दबोच लिया. गिरफ्तार आरोपी की पहचान आजमगढ़ के रहने वाले प्रेम चंद्र मौर्या के रूप में हुई है. पुलिस हिरासत में कड़ाई से की गई पूछताछ में तस्कर ने पूरे रैकेट के कार्यप्रणाली का सनसनीखेज खुलासा किया. पूछताछ में पता चला कि असम के उद्दालगुड़ी का रहने वाला बबरू वर्मन गांजा उपलब्ध कराता था, जिसे गुवाहाटी निवासी बबलू साड़ी के पैकेटों में अच्छी तरह से पैक करता था.
₹3800 किलो में होता था सौदा
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस गिरोह का जाल वाराणसी के अलावा आजमगढ़, गोरखपुर और देवरिया के स्थानीय तस्करों तक फैला हुआ था. उन तक गांजा सुरक्षित पहुंचाने के लिए फर्जी नाम, फर्जी पते और ‘सिल्क साड़ी’ के नाम से रसीदें तैयार की जाती थीं. यूपी के स्थानीय तस्कर कूरियर कार्यालय पहुंचकर रसीद पर अंकित केवल फर्जी नंबर बताते थे और कूरियर कर्मचारी बिना पहचान पत्र जांचे माल सौंप देते थे. बरामद गांजे के इस पूरे सौदे के लिए असम के सप्लायर बबलू को 3,800 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से ऑनलाइन और डिजिटल माध्यमों से भुगतान किया जाता था.
एनसीबी (NCB) ने इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 08, 20, 25, 27ए और 29 के तहत मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी प्रेम चंद्र मौर्या को जेल भेज दिया है. मामले में शामिल कूरियर मैनेजर और असम के मुख्य सप्लायरों की धरपकड़ के लिए एनसीबी द्वारा आगे की विधिक व खोजी कार्रवाई तेजी से की जा रही है.
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