यूपी चुनाव 2027: विजय को फॉलो करने में जुटे राहुल, कोटा टू प्रयागराज कनेक्शन समझें

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यूपी चुनाव 2027: विजय को फॉलो करने में जुटे राहुल, कोटा टू प्रयागराज कनेक्शन समझें


इलाहाबाद: तमिलनाडु में डीएमके से गठबंधन तोड़कर टीवीके (तमिलगा वेत्री कड़गम) के साथ सरकार बनाने के बाद कांग्रेस अब उन्हीं के फॉर्मूले को फॉलो करती दिख रही है. पहली बार पार्टी बनाकर तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उतरे टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय ने 108 सीटों के साथ शानदार जीत दर्ज की. चुनाव के दौरान देखा गया कि विजय ने युवा वोटरों पर अपना फोकस बनाया था, जिसके चलते उन्हीं पहली बार में ही इतनी बड़ी जीत मिली. वोटिंग के दौरान देखा गया कि तमिलनाडु के युवा अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से फोन टीवीके के प्रत्याशियों को वोट देने और विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने की अपील करते दिखे.

विजय के फॉर्मूले को फॉलो करते दिख रहे राहुल?

तमिलनाडु में अपने पुराने सहयोगी डीएमके से दोस्ती तोड़कर राहुल गांधी ने जोसेफ विजय के साथ मिलकर सरकार में शामिल हो गए. देखा जा रहा है कि जब से राहुल की विजय से दोस्ती हुई है उसके बाद उन्होंने भी ‘छात्रों की गूंज’ के नाम से युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम लॉन्च किया है. इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अलग-अलग शहरों में जाकर किसी सेमिनार हॉल में वहां के युवाओं से वन टू वन कनेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं.

कोटा के बाद इलाहाबाद की बारी

पिछले दिनों मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट (NEET) में पेपर लीक के बाद राहुल गांधी को इस तरह के आयोजन करने का तात्कालिक कारण मिल गया है. इसलिए राहुल गांधी अपने संवाद कार्यक्रम के लिए देश के उन शहरों का चयन करते दिख रहे हैं जहां देशभर के युवाओं का हब माना जाता है.

राजस्थान के कोटा में संवाद करने के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस की ‘चतुरों की गूंज’ पहल के तहत स्टूडेंट्स से बातचीत की. यूपी चुनाव 2027 को देखते हुए अब राहुल गांधी अपना अगला संवाद कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में करने की तैयारी में हैं. कांग्रेस जुलाई के दूसरे सप्ताह में होने वाली इस रैली के लिए स्टूडेंट्स और युवाओं को जुटाने के लिए गुरुवार से बड़े पैमाने पर संपर्क अभियान शुरू कर रही है.

प्रयागराज में राहुल के संवाद कार्यक्रम में युवाओं को जुटाने की तैयारी

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी अनिल यादव को प्रयागराज स्टूडेंट कन्वेंशन के लिए कोऑर्डिनेटर बनाया है और उन्हें पेपर लीक, भर्ती में देरी, बेरोजगारी और अच्छी शिक्षा तक पहुंच जैसे स्टूडेंट्स के मुद्दों पर फोकस करने वाले एक महीने के कैंपेन की देखरेख का काम सौंपा है.

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता प्रयागराज में नुक्कड़ सभाएं, नुक्कड़ नाटक, पैम्फलेट बांटने की मुहिम, टॉर्चलाइट मार्च और स्टूडेंट्स, टीचर्स और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स के साथ मीटिंग ऑर्गनाइज करने के लिए फैलेंगे. स्टूडेंट्स के लिए प्रोग्राम के लिए रजिस्टर करने के लिए एक मिस्ड-कॉल कैंपेन भी शुरू किया जा रहा है.

अनिल यादव ने कहा, ‘प्रयागराज पहले से स्टूडेंट पॉलिटिक्स का केंद्र रहा है. स्टूडेंट्स को लगता है कि राहुल गांधी उनकी चिंताओं को उठाते हैं और उन मुद्दों पर बात करते हैं जो उन्हें प्रभावित करते हैं, चाहे वह एजुकेशन हो, पेपर लीक हो या रिक्रूटमेंट हो.’

राहुल गांधी युवाओं से संवाद में पेपर लीक, नौकरी के मुद्दे पर देते हैं जोर

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इस कोशिश का मकसद स्टूडेंट्स की शिकायतों को एक बड़ी पॉलिटिकल बातचीत में बदलना है. पार्टी का प्लान है कि वह न सिर्फ कांग्रेस से जुड़े स्टूडेंट एक्टिविस्ट्स को बल्कि दूसरे ऑर्गनाइज़ेशन्स से जुड़े स्टूडेंट्स, पुराने स्टूडेंट यूनियन लीडर्स और एकेडेमिक्स को भी शामिल करेगी. पार्टी जुलाई में होने वाले राहुल के प्रपोज्ड स्टूडेंट कन्वेंशन के लिए पटना और दिल्ली में भी इसी तरह के आउटरीच की कोशिशों का प्लान बना रही है.

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी अगले 15 दिन कैंपस और कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने वालों के बीच माहौल बनाने में बिताएगी, ताकि राहुल गांधी के दौरे से पहले हाल के पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा से जुड़े विवादों पर छात्रों की नाराजगी को एक बड़े पॉलिटिकल कैंपेन में बदला जा सके. सूत्रों ने कहा कि उनके प्रयागराज प्रोग्राम की आखिरी तारीख अभी तय नहीं हुई है.

कांग्रेस का यह आउटरीच ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में कॉम्पिटिटिव एग्जाम को लेकर छात्रों की अगुवाई में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं. हाल के महीनों में, उम्मीदवार एग्जाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं, कुछ मामलों में दोबारा एग्जाम की मांग की है और आंसर की और इवैल्यूएशन प्रोसेस न बताने का विरोध किया है. सरकारी नौकरियों में भर्ती में देरी और खाली जगहों की चिंता भी राज्य भर में छात्र आंदोलनों में बार-बार आने वाले टॉपिक के तौर पर सामने आई है.

कांग्रेस की ओर से कैंपेन के लिए प्रयागराज को चुनना एक सोचा-समझा पॉलिटिकल कदम माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े एजुकेशन हब में से एक होने के अलावा, यह शहर लंबे समय से छात्र राजनीति का गढ़ रहा है, जहां एग्जाम से जुड़े मुद्दों और भर्ती को लेकर हाल के कई विरोध प्रदर्शनों ने वहां के छात्रों के बीच असर डाला है.

कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि पार्टी युवा वोटरों के बीच बढ़ती निराशा का फायदा उठाना चाहती है, खासकर कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने वाले उम्मीदवार जो कथित पेपर लीक, कैंसिल हुई परीक्षाओं, भर्ती में देरी, दोबारा परीक्षा और रिजर्वेशन से जुड़ी बहसों से प्रभावित हैं. ‘छात्रों की गूंज’ के ज़रिए, पार्टी इन चिंताओं को बताने के लिए खुद को एक प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर स्थापित करना चाहती है, साथ ही पहली बार वोट देने वाले और युवा वोटरों के बीच अपनी पहुँच बढ़ाना चाहती है.

राहुल के प्रयायराज संवाद में प्रियंका के भी शामिल होने की चर्चा

कांग्रेस इस इलाके में अपनी बेहतर चुनावी स्थिति को और बेहतर बनाने की भी उम्मीद कर रही है. इलाहाबाद लोकसभा सीट को अभी कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह रिप्रेजेंट करते हैं, जिनकी 2024 के चुनावों में जीत ने पार्टी को एक ऐसे शहर में पैर जमाने में मदद की, जिसका ऐतिहासिक रूप से नेहरू-गांधी परिवार के साथ मजबूत राजनीतिक संबंध रहा है.

सूत्रों ने आगे बताया कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के भी प्रयागराज प्रोग्राम में राहुल गांधी के साथ शामिल होने की संभावना है, हालांकि आखिरी फैसला अभी आना बाकी है. पार्टी नेता इस इवेंट को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को फिर से खड़ा करने और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए नींव रखने की एक बड़ी स्ट्रैटेजी के हिस्से के तौर पर देख रहे हैं, जिसमें लीडरशिप स्टूडेंट्स, युवाओं और पहली बार वोट देने वालों से फिर से जुड़ना चाहती है और अगले विधानसभा चुनावों से पहले उनकी नाराज़गी को राजनीतिक सपोर्ट में बदलना चाहती है.

17 जून को कोटा स्टूडेंट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए, राहुल गांधी ने कहा था, ‘भारत का एजुकेशन सिस्टम एक एक्सटॉर्शन मशीन है. हम एक ऐसा सिस्टम चाहते हैं जो आपको बड़े सपने देखने दे.’ उन्होंने यह भी कहा था कि यह कैंपेन ‘कोई पॉलिटिकल मीटिंग नहीं है, (बल्कि) उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.’



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