10वीं पास किसान का कमाल, पुश्तैनी जमीन में लाल सोना उगाकर कमा रहा बंपर मुनाफा

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10वीं पास किसान का कमाल, पुश्तैनी जमीन में लाल सोना उगाकर कमा रहा बंपर मुनाफा


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10वीं पास किसान का कमाल, पुश्तैनी जमीन में लाल सोना उगाकर कमा रहा बंपर मुनाफा

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Profitable Tomato Farming: गोंडा के किसान ने यह साबित कर दिया है कि अगर खेती को सही तकनीक और समझ के साथ किया जाए, तो यह किसी बड़े बिजनेस से कम नहीं है. कभी धान और गेहूं की पारंपरिक खेती में घाटा सहने वाले मुकुंद लाल आज टमाटर की खेती से लाखों का टर्नओवर कर रहे हैं. महज 10 हजार रुपये की लागत लगाकर वे सीजन में तीन गुना से ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. उनके टमाटर की चमक अब पूरी वजीरगंज मंडी में बिखरी हुई है.

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज कस्बे में रहने वाले एक प्रगतिशील किसान मुकुंद लाल चौरसिया आज आसपास के इलाकों के लिए मिसाल बन गए हैं. मुकुंद लाल ने सालों पहले धान, गेहूं और गन्ने जैसी पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर टमाटर उगाने का फैसला किया था. आज उनका यह फैसला न केवल सही साबित हुआ है, बल्कि वे इससे लाखों रुपये की कमाई भी कर रहे हैं. कभी लागत के लिए परेशान रहने वाले मुकुंद आज दूसरों को खेती से मुनाफा कमाने के तरीके सिखा रहे हैं.

हाई स्कूल तक की पढ़ाई, फिर किसानी में आजमाया हाथ
लोकल 18 से खास बातचीत के दौरान मुकुंद लाल चौरसिया ने बताया कि उन्होंने केवल हाई स्कूल तक ही पढ़ाई की है. कुछ पारिवारिक कारणों से वे आगे पढ़ नहीं पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पूरी ताकत अपनी पुश्तैनी जमीन पर लगा दी. उन्होंने खेती को केवल जीवन यापन का जरिया नहीं, बल्कि एक व्यापार की तरह देखा और टमाटर की खेती में अपनी किस्मत आजमाई.

दूसरों को देखकर आया टमाटर उगाने का आईडिया
मुकुंद लाल बताते हैं कि पहले वे भी दूसरे किसानों की तरह वही पुरानी फसलें उगाते थे, जिनमें मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम था. फिर उन्होंने कुछ सफल किसानों को टमाटर की खेती करते देखा और गौर किया कि बाजार में टमाटर की मांग साल के 12 महीने बनी रहती है. जिसके बाद उन्होंने जोखिम कम रखने के लिए शुरू में थोड़ी जमीन पर टमाटर लगाए. सही बीज, समय पर सिंचाई और खाद के इस्तेमाल से उनकी पहली ही फसल ने कमाल कर दिया.

टमाटर की ‘501 वैरायटी’ का कमाल
मुकुंद लाल चौरसिया 501 वैरायटी के टमाटर की खेती कर रहे हैं. उनके मुताबिक, यह वैरायटी गोंडा के मौसम और मिट्टी के लिए सबसे शानदार है क्योंकि इसमें फल की क्वालिटी और पैदावार दोनों बहुत अच्छी मिलती है. उन्होंने बताया कि वे जनवरी के आखिरी हफ्ते में टमाटर की रोपाई कर देते हैं. पौधों पर फल आना शुरू हो गए हैं और अप्रैल के आखिर तक इसकी तुड़ाई शुरू हो जाएगी. फल आने के करीब एक महीने बाद तुड़ाई की जाती है ताकि टमाटर अच्छे से लाल हो जाए और दिखने में सुंदर होने के कारण मंडी में इसके दाम बहुत अच्छे मिल सकें.

15 साल का अनुभव और रोजाना 7 क्विंटल की हार्वेस्टिंग
मुकुंद लाल पिछले 15 सालों से टमाटर की खेती कर रहे हैं और अब वे हर सीजन के हिसाब से 12 महीने टमाटर उगाते हैं. हार्वेस्टिंग की बात करें तो उनके खेत से रोजाना लगभग 6 से 7 कुंतल टमाटर निकलता है, जिसकी सप्लाई वे सीधे वजीरगंज की स्थानीय सब्जी मंडी में करते हैं. इससे उन्हें रोज का नगद मुनाफा मिल जाता है. मुकुंद लाल ने बताया कि टमाटर की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें गेहूं-धान के मुकाबले जोखिम कम और नगद आमदनी ज्यादा है.

टमाटर की खेती में लागत और कमाई का पूरा हिसाब
मुकुंद लाल ने बताया कि टमाटर की खेती में लागत बहुत ही कम आती है. एक बीघा खेत में टमाटर लगाने की कुल लागत करीब 8 से 10 हजार रुपये के बीच आती है. वहीं, करीब 6 से 7 महीने की फसल के दौरान 30 से 35 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी आसानी से हो जाती है. मुकुंद लाल चौरसिया का कहना है कि किसानों को अब लकीर का फकीर बनने के अब सब्जियों की खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहिए क्योंकि कम लागत में ज्यादा कमाई का यह सबसे सरल रास्ता है.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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