Ground Report: रूठे बदरा, सूखी नहरें… क्या मानसून तोड़ देगा चंदौली में किसानों की उम्मीदें? देखें ‘धान के कटोरे’ का हाल
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Chandauli News : चंदौली में धान की खेती पर संकट मंडरा रहा है. पानी की कमी से नर्सरी सूख रही है और खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं. किसान गंगा नदी के घटते जलस्तर और सिंचाई विभाग की लापरवाही को इसका प्रमुख कारण बता…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- चंदौली में धान की खेती संकट में.
- सिंचाई के लिए पानी की कमी से किसान परेशान.
- गंगा नदी के घटते जलस्तर से नहरें सूखी.
चंदौली : चंदौली जिले में धान की खेती को लेकर इस समय गंभीर संकट देखने को मिल रहा है. प्री मानसून की बारिश के बाद धान की नर्सरी डालने का समय चल रहा है वहीं कुछ जगहों पर किसान रोपाई की भी तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है सिंचाई के लिए पानी की कमी. गौरतलब है कि किसानों का कहना है कि इस बार लगता है कि बादल रूठ गए हैं, नहरों में पानी न आने की वजह से धान की नर्सरी सूखने की कगार पर पहुंच चुकी थी. खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं. हालांकि कल शाम थोड़ी बारिश हुई है लेकिन हालत अभी भी गंभीर है.
गंगा नदी बनी समस्या की वजह
स्थानीय नेताओं के अनुसार इस संकट के पीछे गंगा नदी के घटते जलस्तर को कारण बताया जा रहा है. चंदौली की नहरों का मुख्य स्रोत गंगा ही है. वहीं, सिंचाई विभाग का कहना है कि पानी की उपलब्धता कम होने के कारण नहरों में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जा सका. हालांकि, किसान इसे विभागीय लापरवाही भी मानते हैं. उनका कहना है कि जल प्रबंधन की सही योजना होती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था.
केदार यादव ने बताया कि कई किसानों ने डीजल पंप से पानी खींचने की कोशिश की, लेकिन डीजल की कीमतें और बिजली की अनियमितता उनके रास्ते में रुकावट बन रही हैं. वहीं, केदार यादव कहते हैं कि अब तो हमें डर है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला, तो धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी. सरकार को या तो वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए या किसानों को मुआवजा देना चाहिए.
सूख रहे धान के कटोरे में खेत
वहीं, जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. अधिकारियों ने केवल आश्वासन दिया है कि जल्द ही कोई समाधान निकाला जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि खेत सूख रहे हैं और किसानों की उम्मीदें भी. कुल मिलाकर ‘धान के कटोरे’ चंदौली के किसानों के लिए यह समय कठिन साबित हो रहा है. यदि जल्द ही पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो इस बार जिले की प्रमुख फसल धान की उपज बहुत प्रभावित हो सकती है.