Success Story Of Ashfaq Ansari: जन्म से विकलांग, पढ़ने की थी ललक, लोगों ने उड़ाया मजाक तो कर दिया ये काम, आज है कामयाब इंसान

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Success Story Of Ashfaq Ansari: जन्म से विकलांग, पढ़ने की थी ललक, लोगों ने उड़ाया मजाक तो कर दिया ये काम, आज है कामयाब इंसान


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UP News: बलरामपुर के अशफाक अंसारी जन्म से विकलांग थे, लेकिन मेहनत और जज्बे से पढ़ाई पूरी कर कॉल सेंटर से लेकर सरकारी नौकरी तक का सफर तय किया. आज वे बहराइच में ब्लॉक मिशन मैनेजर हैं और महिलाओं को आजीविका मिशन से…और पढ़ें

बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में जन्मे अशफाक अंसारी जन्म से ही विकलांग थे. शारीरिक असमर्थता के चलते उन्हें पढ़ाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. विद्यालय घर से 4 किलोमीटर दूर था और रास्ते में एक नाला भी पड़ता था. शुरुआत में परिवार के लोग उन्हें स्कूल छोड़ने जाते थे, लेकिन जब इंटर कॉलेज पहुंचे तो बैसाखी के सहारे खुद आने-जाने लगे.

साइकिल को बनाया साथी, झेले ताने
अशफाक ने देखा कि उनके दोस्त साइकिल से स्कूल आते-जाते हैं. उन्होंने भी साइकिल चलाने का फैसला किया, लेकिन लोगों ने ताने मारना शुरू कर दिया कि एक पैर से विकलांग हो, दूसरा भी टूट जाएगा. अशफाक ने किसी की नहीं सुनी और साइकिल चलाना सीखा. इसी साइकिल से उन्होंने हाईस्कूल और इंटर तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने गोंडा से ग्रेजुएशन और फिर लखनऊ में उच्च शिक्षा के लिए कदम बढ़ाया.

काम किया कॉल सेंटर में, सीखा बोलने का ढंग
लखनऊ में पढ़ाई के दौरान उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. ऐसे में उन्होंने कॉल सेंटर में नौकरी की. अशफाक बताते हैं कि कॉल सेंटर सिर्फ नौकरी नहीं देता, वहां बातचीत करने का सलीका और आत्मविश्वास भी आता है. इसी अनुभव के दम पर उन्होंने कई प्राइवेट संस्थानों में काम किया.

एनजीओ से लेकर सरकारी नौकरी तक का सफर
कॉल सेंटर के बाद अशफाक ने एक एनजीओ के तहत सोशल वर्कर के रूप में काम किया और फिर बहराइच के रुपईडीहा क्षेत्र में कंप्यूटर ट्रेनर बने. छह महीने में प्रमोशन पाकर सेंटर मैनेजर और फिर तीन महीने में डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर बन गए. इसके बाद महोबा जिले में कार्य किया.

ब्लॉक मिशन मैनेजर बनकर कर रहे हैं महिलाओं को सशक्त
उत्तर प्रदेश सरकार की आजीविका मिशन योजना के तहत फॉर्म भरा और पूरे राज्य में सातवीं रैंक प्राप्त की. अब 2021 से बहराइच जिले के चितौरा ब्लॉक में ब्लॉक मिशन मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं. वे हर दिन 100–150 किलोमीटर मोटरसाइकिल से यात्रा कर बेरोजगार महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ते हैं, उन्हें प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाते हैं.

हिम्मत, जुनून और लोगों के ताने बने ताकत
अशफाक अंसारी की कहानी दिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हिम्मत और लगन हो तो सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने समाज की सोच को चुनौती दी और आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं.

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