खेत बर्बाद, फसल तबाह फिर भी किसानों के लिए बाढ़ क्यों अच्छी? हर दस्तक बदल रही किस्मत
Last Updated:
Ghazipur News : यूपी के कई हिस्सों में बाढ़ ने तांडव मचा रखा है. गाजीपुर में हजारों एकड़ खेत तबाह हो चुके हैं. नेनुआ, परवल और लौकी के किसान माथा पीट रहे हैं, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई. उम्मीद बाकी है.
गाजीपुर. यूपी के कई हिस्सों में बाढ़ के कहर ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है. गाजीपुर में भी तांडव देखनो को मिला है. यहां के जंगीपुर, देवकली और कई इलाकों में बाढ़ से हजारों एकड़ खेत तबाह हो चुके हैं. नेनुआ, परवल और लौकी की फसल बर्बाद हो चुकी है. लगभग 50 बीघा खेत बाढ़ से तबाह हो चुके हैं, लेकिन इस तबाही में भी एक अच्छी बात छिपी है. मृदा विज्ञान के रिसर्च स्कॉलर कृष्णा यादव (बांदा यूनिवर्सिटी) बताते हैं कि बाढ़ में बड़ी नदियां जब छोटी नदियों से मिलती हैं, तो खेतों पर दोहरा असर पड़ता है. जैसे जंगीपुर में बेसों नदी, मंगई नदी और देवकली की दांगी नदी के आसपास की जमीनें कटाव की वजह से खेती लायक नहीं रह जातीं. किसान एक सीजन की फसल खो देते हैं, और नुकसान का सामना करते हैं. इन छोटी नदियों का जलस्तर गंगा की वजह से बढ़ने लगता है. अक्सर छोटे-छोटे नाले भी गंगा के जल से मिल जाते हैं और शहरों में भी बाढ़ का पानी पहुंच जाता है.
ये सबसे बड़ा फायदा
रिसर्च स्कॉलर कृष्णा यादव का कहना है कि जिस साल बाढ़ आती है, उसके अगले साल अच्छी फसल की संभावना बढ़ जाती है. बाढ़ का पानी मिट्टी के साथ कई जरूरी पोषक तत्व जैसे फॉस्फोरस और पोटैशियम लाता है. जब पानी उतरता है तो सेंडिमेंट के रूप में ये तत्व मिट्टी में जम जाते हैं, जो फसल के लिए वरदान साबित होते हैं. विशेषकर गेहूं की फसल पर इसका असर साफ दिखता है. धान की खेती तो बाढ़ में प्रभावित होती है, लेकिन अगली फसल भरपूर होती है.
लेकिन ये चिंता भी
रिसर्च स्कॉलर कृष्ण यादव Soil Conservation Society of India का डेटा शेयर करते हुए बताते हैं कि हर साल बाढ़ और बारिश की वजह से प्रति हेक्टेयर 12 टन मिट्टी का कटाव होता है. इससे भूमि की उर्वरता में गिरावट आती है. नुकसान ज्यादा होता है, फायदा सीमित. इस पर ध्यान न दिया गया तो भविष्य में भूमि की गुणवत्ता पर बड़ा असर पड़ेगा.