बेहद खास है यह ‘मोक्ष धाम’, एक साथ हैं सैकड़ों शिवलिंग, सावन में यहां पूजा से हर मन्नत होती है पूरी!

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बेहद खास है यह ‘मोक्ष धाम’, एक साथ हैं सैकड़ों शिवलिंग, सावन में यहां पूजा से हर मन्नत होती है पूरी!


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Meerut Gagol Teerth: मेरठ के गगोल तीर्थ स्थित शिवालय में अगर आप शिवरात्रि के पावन अवसर पर जलाभिषेक करते हैं. तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. सावन में देखने को मिलता है कि विभिन्न शिवालय में भोले भक्त…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • गगोल तीर्थ में सैकड़ों शिवलिंग हैं.
  • शिवरात्रि पर यहां जलाभिषेक से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
  • महर्षि विश्वामित्र की तपोस्थली है गगोल तीर्थ.
विशाल भटनागर/मेरठ : अगर आप भी शिवरात्रि के पावन अवसर पर भोले बाबा की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करना चाहते हैं. इसके लिए ऐसे तीर्थ स्थल की तलाश कर रहे हैं, जहां एक नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में शिवलिंग मौजूद हो. आप पूजा अर्चना कर भोले बाबा को प्रसन्न कर सकें, तो ऐसे सभी शिव भक्तों के लिए महर्षि विश्वामित्र की तपोस्थली गगोल तीर्थ स्थान काफी अच्छा साबित हो सकता है. जहां मोक्ष धाम की तर्ज पर ही तीर्थ स्थल विकसित किया गया हैं. ऐसे में लोकल -18 की टीम द्वारा भी गगोल तीर्थ के महंत शिवदास महाराज से खास बातचीत की गई.

पौराणिक ग्रंथों में भी महत्वपूर्ण है मोक्ष धाम 

महंत शिवदास महाराज ने लोकल -18 से खास बातचीत करते हुए बताया की श्रीमद्भभागवत गीता एवं गरुड़ पुराण में भी आपको इस मोक्ष धाम का उल्लेख मिलेगा. क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने उद्धव एवं वही भगवान विष्णु ने भी गरुड़ को इसके महत्व के बारे में बताया है. उन्होंने बताया कि शास्त्रों का अध्ययन करने के पश्चात ही इस मोक्ष धाम की स्थापना की गई. इसमें जहां बीच में आपको स्वास्तिक देखने को मिलेंगे. वहीं पांच कोनों में ज्ञानेंद्रिय, पांच कर्म इंद्रियां, पांच विभूतियां एवं पंच तत्व को बनाया गया है. साथ ही मनुष्य की 25 विकृतियों को बाहर रखा गया है. ऐसे में श्रद्धालु यहां विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हुए 21 परिक्रमा के बाद ही मुख्य शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बाहर आ सकेंगे. उन्होंने बताया कि यहां  जलाभिषेक करने का उसी तरह से लाभ मिल पाएगा. जिस तरह से हमारे ऋषि मुनि हजारों वर्षों तक पूजा अर्चना करते हुए भगवान को प्रश्न करते थे.  ऐसे में श्रद्धालु भी यहां सावन में पूजा अर्चना कर जलाभिषेक सकते हैं.

इसलिए भी महत्वपूर्ण है यह तीर्थ स्थल 

बताते चलें कि गगोल तीर्थ का सीधा नाता रामायण कालीन युग से माना जाता है. महंत शिवदास महाराज के अनुसार मेरठ रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता मय का क्षेत्र था. ऐसे में यहां राक्षसों का काफी आतंक था. जो ऋषि मुनियों के यज्ञ को पूरा करने नहीं देते थे. ऐसे में महर्षि विश्वामित्र भगवान श्री राम लक्ष्मण को अपने साथ लेकर इस स्थल आए थे. भगवान श्री राम ने ही यहां पर राक्षस का वध किया था. साथ यहां पर एक सरोवर भी है जिसकी उत्पत्ति भी भगवान श्री राम ने तीर मारकर ही की थी . इसलिए तीर्थ स्थल के प्रति लोगों में काफी आस्था देखने को मिलती है. छठ पर्व सहित विभिन्न पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करते हुए दिखाई देते हैं.

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