शायर बशीर बद्र की अंतिम यात्रा पर छलका कवि हरिओम पंवार का दर्द, जताया दुख
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Meerut News: बीते दिनों मशहूर शायर डॉक्टर बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में देहांत हो गया. उन्होंने अपने गजलों और शायरी से लोगों को काफी प्रभावित किया. लेकिन वरिष्ठ कवि डॉक्टर हरिओम पंवार का कहना है कि इतने बड़े शायर की अंतिम विदाई में मात्र 20 लोग पहुंचे, ये बेहद दुखद है.
कवि हरिओम पंवार
मेरठ: बीते दिनों भारतीय गजल सम्राट और शायर डॉक्टर बशीर बद्र का देहांत हुआ. बताया जा रहा है कि डॉक्टर बशीर बद्र के अंतिम सफर में मात्र बीस लोग पहुंचे थे. इस बात पर वरिष्ठ कवि डॉक्टर हरिओम पंवार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ये बेहद दुखद है कि ऐसे महान शायर की ऐसी अंतिम विदाई हुई. ये नजारा देखकर मन को पीड़ा पहुंची है.
डॉक्टर हरिओम पंवार ने कहा कि मेरठ में अगर उनका देहांत होता, तो इतनी उदास विदाई न मिलती. लोगों का कारवां महान शायर की अंतिम विदाई में शिरकत करता. वरिष्ठ कवि डॉक्टर हरिओम पंवार ने भावुक बयान देते हुए कहा कि बहुत कष्ट है कि डॉक्टर बशीर बद्र को ऐसी विदाई मिली. उन्होंने कहा कि उर्दू वाले शायर भी डॉक्टर बशीर बद्र की अंतिम यात्रा में नहीं पहुंचे, ये बेहद दुखद है.
‘इतना बड़ा शायर नहीं हुआ’
डॉक्टर पंवार ने कहा कि डॉक्टर बशीर बद्र बहुत बड़े शायर थे. जीते जी इतना बड़ा शायर नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि डॉक्टर बशीर बद्र बीए में पढ़ते हुए एमए में पढ़ाए जाते थे. पूरी दुनिया में साहित्य के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धि किसी साहित्यकार को हासिल नहीं हुई. अलीगढ़ में पढ़ते हुए डॉक्टर बशीर बद्र पढाने जाते थे. दुनिया की तहजीबों में इतना बड़ा सम्मान किसी को नहीं मिला है. हरिओम पंवार ने डॉक्टर बशीर बद्र के साथ बिताए पलों को साझा किया और कहा कि डॉक्टर बशीर बद्र के साथ वर्षों का साथ रहा. भोपाल से बेहद दुखद खबर मिली है.
बीमारी से जूझ रहे थे शायर बशीर बद्र
गौरतलब है कि बीते दिनों डॉक्टर बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे लंबे समय से डिमेंशिया से जूझ रहे थे, जिसकी वजह से उन्होंने शायरी और पब्लिक लाइफ से दूरी बना ली थी. बशीर बद्र को मॉडर्न गजल का ‘मास्टर’ माना जाता है. उन्होंने पारंपरिक उर्दू के मुश्किल शब्दों की जगह आसान, मखमली और आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी शायरी लोगों के दिलों तक पहुंची.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.