बाढ़ का खतरा? बहराइच में गांव वालों को सिखाया गया तैरने का देसी तरीका, जानें

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बाढ़ का खतरा? बहराइच में गांव वालों को सिखाया गया तैरने का देसी तरीका, जानें


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Bahraich News: बहराइच के महसी क्षेत्र के सिलौटा गांव में एनडीआरएफ ने मॉकड्रिल कर ग्रामीणों को बाढ़ से बचाव के तरीके सिखाए. डूबते लोगों को बचाने, टापू से रेस्क्यू और घरेलू सामान से तैरने वाले यंत्र बनाने की ट्रे…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • बहराइच के महसी क्षेत्र के सिलौटा गांव में मॉकड्रिल का आयोजन किया गया.
  • एनडीआरएफ ने बाढ़ से बचाव और रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया.
  • ग्रामीणों को घरेलू सामान से तैरने वाले यंत्र बनाने की ट्रेनिंग दी गई.

बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हर साल कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं. खासकर महसी क्षेत्र के कई गांव हर बार जलजमाव और तेज बहाव का सामना करते हैं, जिससे लोगों को जान- माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इसी को देखते हुए प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम समय-समय पर लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाती है. इसी कड़ी में बहराइच के सिलौटा गांव में एक मॉकड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को बाढ़ से बचाव के तरीके सिखाए गए.

डूबते लोगों को बचाने का किया गया रिहर्सल
एनडीआरएफ की टीम ने बाढ़ के दौरान होने वाली आपात स्थितियों का नकली अभ्यास कर दिखाया. मॉकड्रिल के जरिए दिखाया गया कि जब कोई व्यक्ति पानी में डूब रहा हो तो उसे किस तरह से सुरक्षित बाहर निकाला जाए. इसके अलावा अगर गांव टापू की तरह चारों ओर से पानी से घिर जाए तो वहां फंसे लोगों को किस तरह निकाला जाए, इसका भी रेस्क्यू ऑपरेशन करके दिखाया गया.

घरेलू सामान से बनाएं तैरने वाला यंत्र
मॉकड्रिल में खास बात यह रही कि ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि बिना किसी महंगे उपकरण के भी वे तैरने के यंत्र खुद बना सकते हैं. उन्हें सिखाया गया कि मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर के ट्यूब, पानी की खाली बोतल, बांस और रस्सी जैसी चीजों का इस्तेमाल करके कैसे आपातकालीन हालात में तैरने का सहारा तैयार किया जा सकता है.

सीआरओ ने दी जरूरी सलाह
इस मौके पर मौजूद बहराइच के सीआरओ देवेंद्र पाल सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में संयम से काम लें. अफवाहें फैलाने या वायरल वीडियो डालने से बचें और सही सूचना ही साझा करें. साथ ही उन्होंने लोगों को घर में तैरने वाले उपकरण पहले से तैयार रखने की सलाह दी ताकि आपात स्थिति में जान बचाई जा सके.

क्या होती है मॉकड्रिल?
मॉकड्रिल एक तरह का अभ्यास होता है जो आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी के लिए किया जाता है. इसमें नकली परिस्थितियां बनाकर लोगों को सिखाया जाता है कि उस समय क्या कदम उठाने चाहिए. जैसे आग, भूकंप, बाढ़ या आतंकवादी हमले जैसी स्थितियों में मॉकड्रिल से लोगों को समय रहते प्रतिक्रिया देने की आदत डाली जाती है.

गांव में जागरूकता जरूरी
एनडीआरएफ की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है, क्योंकि इससे लोगों में डर नहीं बल्कि समझदारी और आत्मनिर्भरता आती है. बाढ़ से पहले ऐसे मॉक अभ्यास करवा कर प्रशासन न सिर्फ नुकसान कम करता है, बल्कि ग्रामीणों को जीवन बचाने का हुनर भी सिखा.

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