कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा, 12वीं पास युवक निकला आरोपी

0
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा, 12वीं पास युवक निकला आरोपी


कानपुर: अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मामले में कानपुर पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है.  पुलिस ने सोमवार को 34 वर्षीय रोहित तिवारी को गिरफ्तार किया, जो सिर्फ 12वीं पास है लेकिन इसके बावजूद वह खुद को डॉक्टर बताकर करीब 30 सर्जरी कर चुका था. आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह 31 मार्च को किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के खुलासे के बाद से गोवा, काठमांडू, मनाली और शिमला में छिपकर फरार चल रहा था.

कैसे हुआ रैकेट का खुलासा

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का खुलासा मसवानपुर स्थित आहूजा अस्पताल में छापेमारी के दौरान हुआ, जहां अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे. जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार कानपुर के अलावा लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक जुड़े हुए थे. आरोपी टेलीग्राम के जरिए गरीब लोगों को 5 से 10 लाख रुपये का लालच देकर उन्हें किडनी बेचने के लिए तैयार करते थे, जबकि अमीर मरीजों से 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक वसूलते थे.

खुद को बताता था डॉक्टर

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि रोहित तिवारी खुद को डॉक्टर बताता था. वैसे पुलिस को उसके कई फोटो मिले हैं, जिनमें वह स्टेथोस्कोप और एप्रन पहनकर ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी करते हुए नजर आ रहा है.

31 मार्च की कार्रवाई के बाद पुलिस ने पनकी कल्याणपुर स्थित प्रिया अस्पताल और आवास विकास कल्याणपुर के मेडलाईफ अस्पताल में भी छापेमारी की. यहां एक महिला का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, जबकि बिहार के बेगूसराय का एक छात्र भर्ती मिला. जांच में सामने आया कि उसकी किडनी उसी महिला को दी गई थी.

टेलीग्राम के जरिए लोगों को बनाता था शिकार

छात्र ने बताया कि वह टेलीग्राम के जरिए एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल के संपर्क में आया था. शिवम ने उसे बड़े सेलिब्रिटीज का उदाहरण देकर किडनी बेचने के लिए तैयार किया. उसने कहा कि अमिताभ बच्चन एक किडनी के साथ भी जिंदा हैं, जबकि प्रेमानंद महाराज की किडनी खराब है. इन बातों से प्रभावित होकर छात्र किडनी बेचने को तैयार हो गया.

अस्पतालों में ट्रांसप्लांट के दौरान नियमों का गंभीर उल्लंघन

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अस्पतालों में ट्रांसप्लांट के दौरान नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया. न तो मरीज की कोई फाइल बनाई गई और न ही डोनर के लिए बेड हेड टिकट (BHT) तैयार किया गया. ऑपरेशन के बाद इलाज से जुड़ी जानकारी साधारण कागज पर बिना किसी आधिकारिक मुहर के लिखी गई.

कौन-कौन है दोषी

इस मामले में अब तक आहूजा अस्पताल के मालिक डॉ. सुरजीत आहूजा और प्रीति आहूजा समेत दलाल शिवम अग्रवाल और 9 अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. वहीं पूछताछ में ये सामने आई है कि रोहित तिवारी इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड था. उसके साथ मेरठ के डॉ. अफजल और ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली का भी नाम सामने आया है.

 आरोपियों की तलाश जारी

इतना ही नहीं पुलिस ने दावा किया है कि इस गिरोह के जरिए कई मरीजों की जान भी गई है, क्योंकि ऑपरेशन करने वाले लोग प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं थे. फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच पुलिस गहनता कर रही है और इसके अलावा अन्य आरोपियों की भी तलाश जारी है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *